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Delhi: जमानत के बाद रिहाई में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, आधार क्यूआर सत्यापन के निर्देश
Wed, 27 May 2026 11:12 PM IST
Akash Dubey
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Akash Dubey
Updated Wed, 27 May 2026 11:12 PM IST
सार
दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत मिलने के बाद कैदियों की तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इसके लिए आधार क्यूआर कोड तकनीक से जमानतदारों का सत्यापन होगा। देरी मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जमानत मिलने के बावजूद महीनों तक जेल में बंद रहने को मजबूर कैदियों के हित में दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम कदम उठाया है। अदालत ने सभी जेल अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि जमानतदारों की पहचान और उनके दस्तावेज के सत्यापन के लिए आधार क्यूआर कोड आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जाए, ताकि जमानत मिलने के बाद कैदियों की तत्काल रिहाई सुनिश्चित हो सके।
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न्यायमूर्ति प्रतिबा एम. सिंह और न्यायमूर्ति अमित महाजन की खंडपीठ ने 22 मई के आदेश में कहा कि जमानत मिलने के बाद भी कैदियों को 50 दिन तक जेल में रखना पूरी तरह अस्वीकार्य है और यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। अदालत ने पाया कि जमानतदारों के सत्यापन में अनावश्यक देरी के कारण कई लोग जरूरत से ज्यादा समय जेल में बिताने को मजबूर हो रहे हैं। कई मामलों में 33 से 56 दिनों तक की देरी सामने आई है।
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अदालत ने निर्देश दिया कि दिल्ली की सभी जेलों में जमानतदारों की पहचान सत्यापित करने के लिए आधार क्यूआर स्कैनर ऐप, एमआधार एप और आधार एप का उपयोग किया जाए। अदालत ने कहा कि यदि अतिरिक्त सत्यापन की आवश्यकता हो तो उसे भी प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा किया जाए। बैंक दस्तावेजों और एफडी की पुष्टि के लिए ईमेल प्रक्रिया जारी रहेगी। बैंकों को भी त्वरित जवाब देने को कहा गया है।
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