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कोरोना: केजरीवाल को हाईकोर्ट की फटकार, कहा-दूसरे राज्य लगा रहे पाबंदी, आप दे रहे छूट
Wed, 11 Nov 2020 02:47 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Wed, 11 Nov 2020 02:47 PM IST
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दिल्ली में परिवहन
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली में कोविड-19 के मामले बढ़ने के दौरान सार्वजनिक सभाओं और परिवहन के संचालन के लिए नियमों में ढील देने के लिए केजरीवाल सरकार की जमकर खिंचाई करते हुए पूछा कि क्या इस ‘भयानक’ स्थिति से निपटने के लिए उसके पास कोई रणनीति या नीति है। अदालत ने कहा कि दिल्ली सरकार ऐसे वक्त छूट दे रही है, जब मामले बढ़ने पर दूसरे राज्यों की सरकारें पाबंदियां लगा रही है।
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हर चौथा व्यक्ति संक्रमित
अदालत ने रेखांकित किया कि 10 नवंबर को दिल्ली में 8,593 नए मामले आए और संक्रमितों की संख्या बढ़ ही रही है, शहर में निषिद्ध क्षेत्रों की संख्या बढ़कर 4,016 हो गई है।अदालत ने कहा कि, नवीनतम सीरो सर्वेक्षण रिपोर्ट इंगित करती है कि दिल्ली में चार में से एक व्यक्ति कोविड-19 से संक्रमित हैं। सीरो सर्वेक्षण का संदर्भ देते हुए अदालत ने कहा, ‘कोई भी घर बचा नहीं है।’
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हालात नियंत्रण से बाहर
अदालत ने सरकार से हैरानी जताते हुए पूछा कि, दिल्ली में संक्रमण बहुत बढ़ चुका है और नियंत्रण से बाहर हो गया है, सरकार के पास इससे निपटने की कोई रणनीति है भी या नहीं। उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को शहर में कोविड-19 के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए पिछले दो सप्ताह में उठाए गए कदमों की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
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अदालत ने 200 लोगों को सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होने और सार्वजनिक परिवहन को पूरी क्षमता से चलाने की अनुमति के पीछे के तर्क पर सवाल किया। पीठ ने कहा कि इससे संक्रमण का प्रसार तेजी से हो सकता है।
कानून क्यों नहीं बना रहे
अदालत ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता सत्यकाम से जानना चाहा कि वह (सरकार) मास्क पहनने को सुनिश्चित करने के लिए क्यों नहीं कोई कानून ला रही जिसे वास्तविक टीका आने तक प्रभावी सुरक्षा उपाय करार दिया जा रहा है।
दो सप्ताह में दें रिपोर्ट
पीठ ने दिल्ली सरकार को दो सप्ताह में स्थिति रिपोर्ट पेश कर उसके द्वारा संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए उठाए कदमों को बताने को कहा, खासतौर पर तब जब कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले चिंताजनक रूप से बढ़ रहे हैं। अदालत इस मामले में अगली सुनवाई 19 नवंबर को करेगी।