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दिल्ली: सिख यात्रियों को घरेलू उड़ान में कृपाण ले जाने की अनुमति पर केंद्र को नोटिस, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Thu, 18 Aug 2022 07:11 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 18 Aug 2022 07:11 PM IST
सार

अधिसूचना के अनुसार सिख यात्रियों को कृपाण ले जाने की अनुमति दी गई है, बशर्ते इसके ब्लेड की लंबाई 15.24 सेमी (6 इंच) से अधिक न हो और कृपाण की कुल लंबाई 22.86 सेमी (9 इंच) से अधिक नहीं होनी चाहिए। भारत के भीतर भारतीय विमानों में हवाई यात्रा करते समय इसकी अनुमति दी गई है।

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delhi high court sends notice to center on permission to keep sikh kirpan in domestic flight seeks reply by n
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सिख यात्रियों को देश में किसी भी घरेलू उड़ान में कृपाण ले जाने की अनुमति संबंधी अधिसूचना को सुरक्षा की अवहेलना का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। अदालत ने इस मुद्दे पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय, गृह मंत्रालय, नागरिक उड्डयन महानिदेशक और नागरिक उड्डयन ब्यूरो के महानिदेशक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए सुनवाई 15 नवंबर तय की है।

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अधिसूचना के अनुसार सिख यात्रियों को कृपाण ले जाने की अनुमति दी गई है, बशर्ते इसके ब्लेड की लंबाई 15.24 सेमी (6 इंच) से अधिक न हो और कृपाण की कुल लंबाई 22.86 सेमी (9 इंच) से अधिक नहीं होनी चाहिए। भारत के भीतर भारतीय विमानों में हवाई यात्रा करते समय इसकी अनुमति दी गई है।
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याचिका में कहा गया है कि लागू अधिसूचना सिख भारतीय नागरिकों के लिए प्रयोज्यता को अलग नहीं करती है, जिससे यह दावा किया जाता है कि अन्य देशों के सिख यात्री भी घरेलू मार्गों पर किसी भी भारतीय विमान में यात्रा करते समय व्यक्तिगत रूप से कृपाण ले जा सकते हैं।
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याची ने कहा यदि राज्य अपने धार्मिक नुस्खे और पवित्रता को बनाए रखने के लिए भारत में उड़ानों में व्यक्ति पर कृपाण ले जाने की मांग को स्वीकार कर लेता है, तो उन देशों में ऐसी निर्देशात्मक पवित्रता का क्या होता है जहां इस प्रकार की छूट नहीं है। क्या आस्था अपवित्र हो जाती है यदि एक कृपाण अनिवार्य रूप से पैक किया जाता है और केवल चेक-इन बैगेज में ही ले जाया जाता है? भारत में उड़ानों में व्यक्ति के कैरिज द्वारा धार्मिक आस्था कैसे पवित्र होती है और फिर भी अन्य देशों में चेक-इन बैगेज में कैरिज द्वारा पवित्र हो जाती है?

याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि लागू अधिसूचना कानून में खराब है और इसने नागरिक उड्डयन सुरक्षा प्रोटोकॉल और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों को धोखा दिया है। इसमें कहा गया है कि अधिसूचना बिना सोचे-समझे जारी की गई है जिससे सुरक्षा और सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया।


याची ने कहा एक विशेष धर्म की मांगों को पूरा करने के लिए तत्परता में राज्य बिना किसी तथ्यात्मक आधार के बिना किसी तथ्यात्मक आधार पर कृपाणों की अप्रतिबंधित और अनर्गल सवारी पर अप्रतिबंधित और अनियंत्रित अनुमति देकर सतर्कता की आवश्यकता की अवहेलना नहीं कर सकता है।

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