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दिल्ली: कृषि बाजारों में कार्यरत पल्लेदारों या हेड लोड श्रमिकों के वेतन में संशोधन मुद्दे पर दिल्ली सरकार व अन्य को नोटिस जारी
Fri, 03 Dec 2021 12:58 AM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Fri, 03 Dec 2021 12:58 AM IST
सार
यह याचिका राष्ट्रीय हमाल पंचायत असंगठित कामगार यूनियन ने दायर की है। यूनियन में आजादपुर मंडी में काम करने वाले पल्लेदार शामिल हैं, जो फलों और सब्जियों के लिए एशिया का सबसे बड़ा होलसेल बाजार है।
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
विस्तार
उच्च न्यायालय ने गुरुवार को दिल्ली के कृषि बाजारों में कार्यरत पल्लेदारों या हेड लोड श्रमिकों को देय वेतन में संशोधन नहीं करने के मुद्दे पर दायर याचिका पर दिल्ली सरकार व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह याचिका जी-श्रेणी के लाइसेंस जारी करने से भी संबंधित है।
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न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने मामले में दिल्ली सरकार के अलावा दिल्ली एग्रीकल्चर मार्किट बोर्ड और एपीएमसी आजादपुर को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 16 फरवरी तय की है।
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यह याचिका राष्ट्रीय हमाल पंचायत असंगठित कामगार यूनियन ने दायर की है। यूनियन में आजादपुर मंडी में काम करने वाले पल्लेदार शामिल हैं, जो फलों और सब्जियों के लिए एशिया का सबसे बड़ा होलसेल बाजार है।
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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि याचिका में अधिकारियों के प्रतिनिधित्व के बावजूद 1980 से पल्लेदारों के वेतन में संशोधन नहीं करने सहित विभिन्न बुनियादी मुद्दों को उठाया गया है। इसके अलावा याचिका में उन्हें लाइसेंस जारी करने का मुद्दा भी उठाया गया है।
दिल्ली कृषि उत्पाद विपणन (विनियमन) सामान्य नियम के नियम के अनुसार प्रतिवादियों का कर्तव्य है कि वे पल्लेदारों को देय शुल्क को पीस रेट के आधार पर तय करें। हालांकि यह दावा किया गया है कि उक्त शुल्क को 1980 से वैधानिक रूप से संशोधित नहीं किया गया है, इसलिए यह उचित पारिश्रमिक के उनके वैध अधिकार का घोर उल्लंघन है।
इसके अलावा, याचिका दिल्ली कृषि उत्पाद विपणन (विनियमन) अधिनियम की धारा 80 और नियमों के नियम 15 पर निर्भर है जो दो रुपये के वार्षिक शुल्क पर इन पल्लेदारों को नि:शुल्क जी-श्रेणी के लाइसेंस जारी करने का प्रावधान करती है।
याचिका के अनुसार कहा गया है कि ए.पी.एम.सी. आजादपुर मार्केट में उन्हें लाइसेंस और बैज जारी करने के प्रावधानों का अनुपालन किया जा रहा। याचिका में कहा गया है कि लाइसेंस और बैज के अभाव में श्रमिकों के पास कोई दस्तावेजी सबूत या मंडी में उनका काम नहीं है और उनका एपीएमसी के साथ कोई औपचारिक मान्यता या संबंध नहीं है। इससे उनका शोषण होता है।
उन्हें कमीशन एजेंटों की दया पर काम करना पड़ता है। पल्लेदारों के लिए कोई सुरक्षा या काम उपलब्ध नहीं है और बाजार में किसी भी दुर्घटना के मामलों में: वे कानूनी रूप से बाजार में अपना अस्तित्व स्थापित नहीं कर सकते हैं। याची ने कहा उनकी समस्याओं के लिए शिकायत निवारण के लिए कोई तंत्र उपलब्ध नहीं है।