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Delhi High Court: वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के प्रावधानों के मामले में केंद्र को नोटिस, पढ़ें पूरा मामला
Mon, 22 Aug 2022 09:59 PM IST
आकाश दुबे
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: आकाश दुबे
Updated Mon, 22 Aug 2022 09:59 PM IST
सार
अधिनियम वृद्ध व्यक्तियों को उनके बच्चों को हस्तांतरित संपत्ति को शून्य घोषित करने का लाभ देता है, यदि वे देखभाल नहीं करते। याची ने कहा कि उसे इस अधिनियम का लाभ मिलना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने मामले की सुनवाई 13 दिसंबर तय की है। साथ ही केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
97 वर्षीय एक व्यक्ति ने वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के कुछ प्रावधानों को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। अधिनियम वृद्ध व्यक्तियों को उनके बच्चों को हस्तांतरित संपत्ति को शून्य घोषित करने का लाभ देता है, यदि वे देखभाल नहीं करते। अदालत ने नोटिस जारी कर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याची ने कहा कि उसे इस अधिनियम का लाभ मिलना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने मामले की सुनवाई 13 दिसंबर तय की है।
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याचिका में माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 के प्रावधानों को चुनौती दी गई है, जिसके तहत एक वरिष्ठ नागरिक जिसने कानून के लागू होने के बाद अपनी संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित कर दी है, इस शर्त के अधीन कि वह हस्तांतरणकर्ता की बुनियादी सुविधाओं और बुनियादी भौतिक आवश्यकताओं की देखभाल करेगा। हालांकि यह लाभ उन लोगों को प्रदान नहीं किया जाता है, जिन्होंने अधिनियम से पहले अपनी संपत्तियों को स्थानांतरित कर दिया है।
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प्रावधान के अनुसार, यदि संपत्ति पाने वाला ऐसा करने में विफल रहता है तो संपत्ति का हस्तांतरण धोखाधड़ी या जबरदस्ती या अनुचित प्रभाव के तहत किया गया माना जाएगा और ट्रिब्यूनल हस्तांतरणकर्ता के विकल्प पर इसे शून्य घोषित कर सकता है। उस व्यक्ति ने दावा किया कि उसके बेटों ने उसकी देखभाल नहीं की और न ही उसका भरण-पोषण किया। इसके बजाय वे किराए पर संपत्ति देकर और हर महीने मोटी कमाई करके आनंद लेने लगे।
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