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Delhi: वक्फ बोर्ड के इमामों को ही वेतन क्यों? सरकार की नीति के खिलाफ याचिका पर कोर्ट ने AAP से मांगा जवाब

Thu, 21 Mar 2024 06:14 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 21 Mar 2024 06:14 PM IST
सार

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार, उसके वित्त और योजना विभागों और दिल्ली वक्फ बोर्ड से जवाब मांगा है।

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Delhi High Court seeks reply from government on the policy of paying salaries to Imams of Delhi Waqf Board
वक्फ बोर्ड के इमामों को ही वेतन क्यों? कोर्ट ने मांगा दिल्ली सरकार से जवाब - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को दिल्ली वक्फ बोर्ड और गैर वक्फ बोर्ड के इमामों और मुअज्जिनों को वेतन और मानदेय जारी करने के लिए राज्य की समेकित निधि का उपयोग करने की दिल्ली सरकार की नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब मांगा है।

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार, उसके वित्त और योजना विभागों और दिल्ली वक्फ बोर्ड से जवाब मांगा है।

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यह याचिका पेशे से वकील और सामाजिक कार्यकर्ता रुक्मणि सिंह ने दायर की है, जिसमें दिल्ली सरकार और वक्फ बोर्ड को बोर्ड और गैर वक्फ बोर्डों के इमामों और मुअज्जिनों को समेकित निधि से वेतन या पारिश्रमिक प्रदान करने से रोकने की मांग की गई है। अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर विचार करने की जरूरत है। अदालत ने सुनवाई जुलाई माह में तय की है।

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दिल्ली सरकार के स्थायी वकील संतोष कुमार त्रिपाठी के मौखिक अनुरोध के बाद पीठ ने दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग को भी जनहित याचिका में प्रतिवादी पक्ष के रूप में शामिल किया।

सिंह की याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार द्वारा एक विशेष धार्मिक समुदाय के कुछ व्यक्तियों को अन्य धार्मिक समुदाय के समान श्रेणी के व्यक्तियों की वित्तीय स्थिति पर विचार किए बिना सम्मान राशि देने की प्रथा सीधे राज्य की धर्मनिरपेक्ष प्रकृति का उल्लंघन करती है और अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करती है।

जनहित याचिका में अखिल भारतीय इमाम संगठन बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया जिसमें यह माना गया था कि इमामों को भुगतान करने के लिए संसाधनों का उपयोग करना वक्फ बोर्ड का कर्तव्य है जो एक मस्जिद में प्रार्थना का महत्वपूर्ण कर्तव्य निभाते हैं, अर्थात् समुदाय का नेतृत्व करते हैं।

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