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हाईकोर्ट: जिम्मेदारी न निभाने वाले निगम कर्मियों की सहायता करने और वेतन दिलाने के लिए अदालत बाध्य नहीं

Thu, 07 Oct 2021 12:49 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 07 Oct 2021 12:49 AM IST
सार

खंडपीठ ने कहा कि हम एक ओर निगम कर्मियों के वेतन एवं पेंशन के भुगतान के लिए जोर दे रहे हैं, लेकिन ये कर्मी और खासतौर से सफाई कर्मी अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह नहीं कर रहे हैं। इसके के कारण शहर में डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं, कूड़े और मलबे का ढेर, टूटी सड़कें और फुटपाथ हैं। 

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Delhi High court says that it is not liable to help those municipal corporation employee who are not fulfilling their responsibility
दिल्ली हाईकोर्ट

विस्तार

जो निगम कर्मी अपने कर्तव्य का निर्वाह नहीं कर रहे हैं और शहर को भयानक हालात में छोड़ दिया है, उनकी सहायता करने और उन्हें वेतन दिलाने के लिए हाईकोर्ट बाध्य नहीं है। यह बात हाईकोर्ट ने निगम कर्मियों के वेतन एवं पेंशन भुगतान संबंधी कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कही। 

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न्यायमूर्ति विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राजधानी में सफाई और रखरखाव के हालात पर अपनी नाराजगी जाहिर की। खंडपीठ ने कहा कि हम एक ओर निगम कर्मियों के वेतन एवं पेंशन के भुगतान के लिए जोर दे रहे हैं, लेकिन ये कर्मी और खासतौर से सफाईकर्मी अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह नहीं कर रहे हैं। इसके के कारण शहर में डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं, कूड़े और मलबे का ढेर, टूटी सड़कें और फुटपाथ हैं। 
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न्यायमूर्ति सांघी ने सैनिक फार्म इलाके का जिक्र करते हुए कहा वहां से प्लास्टिक का एक टुकड़ा नहीं उठाया गया। वो जगह लगातार मैली कुचैली है, वहां पर गाय प्लास्टिक खा रही हैं। उसे खाकर वे मर जाएंगी। उन्हें कुछ काम करना पड़ेगा क्योंकि धरातल पर कुछ नहीं है। वेतन और पेंशन के रूप में सैकड़ों करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। 
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न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि ये बेहद निराशा की स्थिति है। शहर को क्या हो रहा है? याचिकाकर्ताओं और निगमों में जिम्मेदारी का एहसास कहां है? इस सबके कारण अंत में नागरिकों को ही परेशान होना पड़ता है। 


एक नगर निगम की ओर से वकील ने बताया कि अगर कर्मियों की बात नहीं मानी जाती तो वे हड़ताल पर चले जाते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर कर्मी अनुचित और बेकार कारण से हड़ताल पर जाते हैं तो वे उनके लिए अपने विवेकाधिकार का प्रयोग नहीं करेंगे। केवल आपकी ही बात नहीं मानी जाएगी। आप हमारे सिर पर बंदूक नहीं रख सकते। आपको जिम्मेदारी भी लेनी होगी। अब बहुत हो चुका। अदालत ने अगली सुनवाई एक दिसंबर तय करते हुए वेतन एवं पेंशन भुगतान के संबंध में रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है। 

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