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Delhi : हाईकोर्ट ने कहा- कमरे में बंद करना भी हाथ बांधकर कैद करने जैसा अपराध, दोषी साबित करने के लिए पर्याप्त
Wed, 23 Jul 2025 06:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 23 Jul 2025 06:03 AM IST
सार
कोर्ट ने माना कि किसी व्यक्ति को कमरे में बंद करना भी इस अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त माना जाएगा।
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Delhi High Court
- फोटो : ANI
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विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट किया कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 342 के तहत गलत कैद के अपराध के लिए यह जरूरी नहीं है कि पीड़ित के हाथ बांधे जाएं। कोर्ट ने माना कि किसी व्यक्ति को कमरे में बंद करना भी इस अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त माना जाएगा।
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यह फैसला न्यायमूर्ति गिरिश कथपालिया की खंडपीठ ने सुनाया। मामला एक महिला की शिकायत पर आधारित था, जो एक कंपनी में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी। महिला ने आरोप लगाया कि कंपनी के मालिक ने उसे शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए और बाद में पत्नी के साथ मिलकर उसे अपने घर में बंद कर पीटा। पीड़िता के बयान पर शिकायत दर्ज की गई। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने प्रतिवादियों को धारा 323 और 342 से बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
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कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के एमएलसी (मेडिको-लीगल सर्टिफिकेट) में चोटों का उल्लेख न होना उसके बयान को खारिज करने के लिए पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के स्पष्ट बयान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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कमरे में बंद करना भी धारा 342 के तहत प्रथम दृष्टया अपराध को साबित करने के लिए काफी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रायल के दौरान ही यह पता चलेगा कि चोटें क्यों नहीं दिखीं, न कि चार्ज के चरण में इसका गहन विश्लेषण करना उचित होगा।