Delhi riot: दिल्ली पुलिस को हाईकोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार, कहा- एसपीपी और एक अधिकारी ने अदालत को बनाया मूर्ख
अदालत ने कहा यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज तक विशेष पीपी और एसआई राजीव इस वीडियो और एफएसएल के समक्ष रिपोर्ट के लंबित होने के नाम पर इस अदालत को बेवकूफ बना रहे थे।
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अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित एक अन्य मामले की जांच के लिए दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) और दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी को अदालत को मूर्ख बनाने के लिए फटकार लगाई है।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला ने साहीन सैफी के घर को जलाने से संबंधित एक मामले में यह फटकार लगाई है।
अदालत ने पाया कि विशेष लोक अभियोजक ने यह कहकर अदालत को बेवकूफ बनाया कि मुकदमे के लिए आवश्यक वीडियो अभी तक फोरेंसिक प्रयोगशाला से प्राप्त नहीं हुआ है, जब बाद में पता चला कि ऐसा वीडियो उस समय प्रयोगशाला में है ही नहीं। अदालत ने कहा यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज तक विशेष पीपी और एसआई राजीव इस वीडियो और एफएसएल के समक्ष रिपोर्ट के लंबित होने के नाम पर इस अदालत को बेवकूफ बना रहे थे, जबकि वास्तव में उनके पास इसके संबंध में कोई जानकारी नहीं थी। अदालत ने कहा भविष्य में इसे दोहराया नहीं जाना चाहिए।
इससे पहले 13 मार्च को इस मामले की सुनवाई तब स्थगित कर दी गई थी जब एसपीपी ने अदालत को बताया था कि इस मामले में एक गवाह द्वारा आरोपी की पहचान के लिए इस्तेमाल किए गए सीसीटीवी फुटेज की फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) रोहिणी में जांच लंबित है। इसके बाद कोर्ट ने एफएसएल के निदेशक को वीडियो की जांच की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया। हालाँकि, निदेशक ने एक महीने बाद अदालत को बताया कि उनके रिकॉर्ड में वर्तमान एफआईआर में किसी भी मामले की संपत्ति जमा नहीं की गई।
छह जुलाई को पुलिस ने अदालत को बताया कि पहले संदर्भित वीडियो 24 फरवरी 2020 की एक घटना से संबंधित है, जबकि वर्तमान मामला 25 फरवरी, 2020 की एक घटना से संबंधित है। पुलिस ने कहा कि वीडियो पहले बताया गया मामला वर्तमान मामले के लिए प्रासंगिक नहीं था और पुलिस इस वीडियो पर पहले एफएसएल रिपोर्ट नहीं मंगाना चाहती थी। हालांकि उस दिन प्रस्तुत की गई पुलिस स्थिति रिपोर्ट में एफआईआर संख्या 60/20 में प्रस्तुत एक वीडियो का उल्लेख किया गया था। कोर्ट ने कहा था अगर वीडियो का इस्तेमाल मौजूदा मामले में किसी गवाह द्वारा दोषियों/आरोपी की पहचान के लिए किया जाता है, तो भी यह इस मामले में अभियोजन के लिए प्रासंगिक हो जाता है।
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हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि थानाध्यक्ष द्वारा भेजे गए पत्र में स्वयं उल्लेख किया गया था कि एफएसएल के एक अधिकारी ने सूचित किया था कि एफआईआर 60/20 में मामले की संपत्ति और रिपोर्ट बहुत पहले ही 29 दिसंबर, 2020 को एकत्र कर ली गई थी।