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दिल्ली: हाईकोर्ट ने खारिज की जनहित याचिका, कहा- ऐसा कोई डाटा नहीं जो दिखाए स्कूल खुलने पर फैलेगा कोरोना संक्रमण

Tue, 29 Mar 2022 04:02 PM IST
पूजा त्रिपाठी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 29 Mar 2022 04:02 PM IST
सार

चीफ जस्टिस विपिन सांघी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि एक संतुलन बना कर रखना बहुत जरूरी है, बच्चों को स्कूल बंद होने से फायदे से ज्यादा नुकसान हुआ है।

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Delhi High court rejects PIL against full physical reopening of schools says no data shows life would be endangered
फाइल फोटो - फोटो : संवाद

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक जनहित याचिका को यह कहते हुए सुनने से इनकार कर दिया कि, ऐसा कोई डाटा उपलब्ध नहीं है जो ये दिखाता हो कि पूरी क्षमता के साथ स्कूल खुलने से कोरोना का संक्रमण फैलेगा और बच्चों की जान खतरे में पड़ेगी। दरअसल यह जनहित याचिका एक अप्रैल से पूरी क्षमता के साथ स्कूलों के खुलने के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी।

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चीफ जस्टिस विपिन सांघी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि एक संतुलन बना कर रखना बहुत जरूरी है, बच्चों को स्कूल बंद होने से फायदे से ज्यादा नुकसान हुआ है। जनहित याचिका की सुनवाई कर रही पीठ में जस्टिस नवीन चावला भी शामिल थे जिन्होंने अधिवक्ता आनंद कुमार पांडेय की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इस याचिका को किसी विशेषज्ञ की राय की अनुपस्थिति में नहीं सुना जा सकता।
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याचिका में तर्क रखा गया था कि 14 साल से कम उम्र के बच्चों को स्कूल जाकर कक्षाएं लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता क्योंकि उन्हें कोविड-19 का टीका नहीं लगा है। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में दिल्ली सरकार को निर्देश देने की मांग की थी कि वह 1 अप्रैल से पूरी क्षमता के साथ स्कूल खुलने के अपने आदेश को वापस ले ले।
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याचिकाकर्ता ऐसा कुछ भी पेश नहीं कर सके जो दिखाए कि बच्चों को है खतरा
अदालत ने याचिकाकर्ता से अपने आदेश में कहा, मुद्दा यह है कि हर चीज में एक संतुलन होना चाहिए। बच्चे स्कूल न जाने से ज्यादा नुकसान में हैं। ऐसा कोई डाटा उपलब्ध नहीं है जो ये बताए कि कोरोना से संक्रमित होने का बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा है या उन्हें गंभीर रूप से यह संक्रमण अपना शिकार बना सकता है।

अदालत ने ये भी कहा कि यह याचिका याचिकाकर्ता की अपनी राय पर डाली गई है और इसका कोई ठोस आधार नहीं है। ऐसा कुछ भी वह प्रस्तुत नहीं कर सके हैं जो ये दिखाए कि स्कूल खुलने से जीवन का अधिकार खतरे में पड़ जाएगा।


अदालत ने यह पाया कि बच्चों के स्कूल जाने से कोविड का क्या खतरा है वो डाटा तो उपलब्ध नहीं है लेकिन ये डाटा जरूर उपलब्ध है कि उनके स्कूल न जाने से क्या नुकसान होंगे। अदालत ने कहा कि अध्ययन दिखाते हैं कि बच्चों के स्कूल न जाने से उनमें सामाजिक, व्यावहारिक और पारस्परिक कौशल विकसित नहीं हो पा रहे। अदालत ने कहा कि हमें इस याचिका में कोई गुण नहीं दिखता इसलिए इसे खारिज करते हैं।

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