दिल्ली हाईकोर्ट ने रेलवे को दिया आदेश, 15 मई तक हलफनामा दायर कर बताएं सुरक्षा की रूपरेखा
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एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने रेलवे को हलफनामा दायर करने के लिए कहा है, जिसमें रेलवे को सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी देने तथा भविष्य की रूपरेखा पेश करने के लिए कहा। इसके लिए अदालत ने रेलवे को 15 मई तक का समय दिया है।
याचिका में दावा किया गया था कि रेलवे स्टेशन आतंकियों के लिए आसान निशाना होते हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि हमें अतीत में हुए हमलों से सबक लेना चाहिए। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि ज्यादातर स्टेशनों पर टक्कर रोधी उपकरण तक नहीं लगे हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि रेलवे ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत दी अपनी जानकारी में स्वीकार किया है कि उसे अपने स्टेशनों पर सुरक्षा उपायों के लिए बजट में बड़ी राशि मिली है।
याचिका के मुताबिक, बड़ी राशि मिलने के बावजूद रेलवे सुरक्षा तंत्र को सही से विकसित करने में नाकाम रहा है। याचिका की सुनवाई में रेलवे ने हाईकोर्ट को जवाब देते हुए यह भरोसा दिया कि उसने स्टेशनों पर सामान की जांच करने वाले उपकरण, मेटल डिटेक्टर और सीसीटीवी कैमरे लगाने जैसे कई सुरक्षा उपाय किए हैं।
वकील कुश कालरा की याचिका पर की गई सुनवाई
पीठ वकील कुश कालरा की याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें देश के सभी रेलवे स्टेशनों पर सामान की जांच करने वाले उपकरण, हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर और सीसीटीवी कैमरे लगाने जैसे सुरक्षा उपाय करने का अनुरोध किया गया है। वहीं इससे पहले रेलवे के वकील ने मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और जस्टिस सी हरि शंकर की पीठ को बताया, याचिकाकर्ता ने जो कहा है वह हम पहले से ही मुहैया करा रहे हैं या ऐसा करने की प्रक्रिया में हैं। साथ ही रेलवे ने हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा था।