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Delhi NCR News: दिल्ली हाईकोर्ट नेविवादित फोन रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच के आदेश
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नितिन नरेश ने ऑडियो को एआई वॉयस क्लोन बताया, सीएफएसएल रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता और हैश वैल्यू की करेगा जांच
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक विवादित फोन रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता की जांच के लिए इसे सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (सीएफएसएल) भेजने का निर्देश दिया है। रिकॉर्डिंग कथित तौर पर नितिन नरेश और बीपीटीपी लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि जय शंकर के बीच बातचीत की बताई जा रही है। नरेश ने दावा किया है कि ऑडियो उनकी आवाज का एआई-जनित क्लोन हो सकता है।
न्यायमूर्ति तुषार राव गेदेला ने बीपीटीपी की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। कंपनी ने आरोप लगाया था कि 3 सितंबर के अदालत के आदेश के बाद नरेश ने उसके अधिकृत प्रतिनिधि से कथित तौर पर पैसे मांगने वाली धमकी भरी बातचीत की। कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर ने करीब 12 मिनट की रिकॉर्डिंग अदालत के सामने पेश की और उसे सुनने का अनुरोध किया।
नरेश ने व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर बातचीत से इनकार किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा एआई वॉयस-क्लोनिंग तकनीक के जरिए उनकी आवाज की नकल कर रिकॉर्डिंग तैयार की जा सकती है। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाते हुए फॉरेंसिक जांच की मांग की।
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अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और रिकॉर्डिंग की सत्यता स्थापित किए बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि रिकॉर्डिंग को पेन ड्राइव में सुरक्षित कर रजिस्ट्रार जनरल द्वारा सील किया जाए और सीबीआई मुख्यालय, लोधी रोड से जुड़े सीएफएसएल को भेजा जाए। मूल रिकॉर्डिंग और जिस डिवाइस पर इसे रिकॉर्ड किया गया, उसे भी जांच के लिए सौंपने का निर्देश दिया गया है। सीएफएसएल रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता के साथ उसकी हैश वैल्यू की भी जांच करेगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक विवादित फोन रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता की जांच के लिए इसे सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (सीएफएसएल) भेजने का निर्देश दिया है। रिकॉर्डिंग कथित तौर पर नितिन नरेश और बीपीटीपी लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि जय शंकर के बीच बातचीत की बताई जा रही है। नरेश ने दावा किया है कि ऑडियो उनकी आवाज का एआई-जनित क्लोन हो सकता है।
न्यायमूर्ति तुषार राव गेदेला ने बीपीटीपी की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। कंपनी ने आरोप लगाया था कि 3 सितंबर के अदालत के आदेश के बाद नरेश ने उसके अधिकृत प्रतिनिधि से कथित तौर पर पैसे मांगने वाली धमकी भरी बातचीत की। कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर ने करीब 12 मिनट की रिकॉर्डिंग अदालत के सामने पेश की और उसे सुनने का अनुरोध किया।
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नरेश ने व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर बातचीत से इनकार किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा एआई वॉयस-क्लोनिंग तकनीक के जरिए उनकी आवाज की नकल कर रिकॉर्डिंग तैयार की जा सकती है। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाते हुए फॉरेंसिक जांच की मांग की।
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अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और रिकॉर्डिंग की सत्यता स्थापित किए बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि रिकॉर्डिंग को पेन ड्राइव में सुरक्षित कर रजिस्ट्रार जनरल द्वारा सील किया जाए और सीबीआई मुख्यालय, लोधी रोड से जुड़े सीएफएसएल को भेजा जाए। मूल रिकॉर्डिंग और जिस डिवाइस पर इसे रिकॉर्ड किया गया, उसे भी जांच के लिए सौंपने का निर्देश दिया गया है। सीएफएसएल रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता के साथ उसकी हैश वैल्यू की भी जांच करेगा।