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दिल्ली हाईकोर्ट ने कर्नल दंपती को 15 दिनों के भीतर अलग-अलग स्थानों पर पदभार ग्रहण करने का दिया आदेश, ये है मामला

Tue, 20 Oct 2020 05:47 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 20 Oct 2020 05:47 PM IST
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Delhi high court orders colonel couple to join on different places in 15 days, know full matter
दिल्ली उच्च न्यायालय (फाइल फोटो)

दिल्ली हाईकोर्ट ने दो अलग-अलग स्थानों पर तैनाती के आदेश को चुनौती देने वाले सेना के एक कर्नल दंपती को 15 दिनों के भीतर जिन नई जगहों पर पोस्टिंग दी गई है, वहां पदभार ग्रहण करने को कहा।

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न्यायमूर्ति राजीव सहाय और आशा मेनन की पीठ ने कर्नल अमित कुमार की याचिका पर फैसला सुनाते हुए यह निर्देश जारी किया। याचिका में कर्नल ने इस आधार पर राजस्थान के जोधपुर से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में अपनी तैनाती के आदेश को चुनौती दी थी कि, उनकी पत्नी को कर्नल के पद पर पदोन्नत करके बठिंडा भेजा जा रहा है।
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कुमार सेना के जज एडवोकेट जनरल (जेएजी) विभाग में एक अधिकारी हैं। पीठ ने कहा कि सेना ने अपने आदेश में पति-पत्नी को एक जगह पोस्टिंग देने के कुमार के अनुरोध को खारिज करने का कारण बताया है और अदालत के इस मामले में हस्तक्षेप के लिए दुर्भावना या नियमों के उल्लंघन का कोई आधार नहीं बना है।

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अदालत ने कहा, 'आदेश (सेना के) से यह स्पष्ट है कि सभी पहलुओं पर विचार किया गया है।' पीठ ने 15 सितंबर को सेना से दंपती के अनुरोध पर विचार कर चार सप्ताह में निर्णय लेने के लिए कहा था। हाईकोर्ट ने 20 अक्तूबर को सुनवाई की अगली तारीख तक दोनों अधिकारियों की तैनाती पर रोक लगा दी थी।

सेना की सैन्य सचिव शाखा ने बाद में, 30 सितंबर को एक आदेश पारित किया, जिसमें 'सीमा पर अभियानगत स्थिति', 'संगठनात्मक हित' और जेएजी विभाग में ऐसे वरिष्ठ अधिकारियों के अभाव का हवाला देते हुए अनुरोध को खारिज कर दिया था।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान पीठ ने दोनों अधिकारियों की शिकायतों के संबंध में सूचना मीडिया को लीक किये जाने पर नाराजगी जताई और कहा, ‘या तो आप मीडिया के पास जा सकते हैं या अदालत के पास आएं।'

पीठ ने कहा कि खबरों में दोनों अधिकारियों की जरूरतों को उजागर करते हए सेना को ‘असंवेदनशील’ के रूप में चित्रित किया गया है। उन्होंने कहा, हम याचिकाकर्ता के इस आचरण की सराहना नहीं करते हैं कि जब मामला अदालत में लंबित है, तो वह मीडिया से संपर्क कर रहे हैं।

हालांकि, कुमार ने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने मीडिया को कोई जानकारी नहीं दी है और न ही कोई साक्षात्कार दिया है।
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