फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   delhi high court on e rickshaw ban

ई-रिक्शा विवाद: कोर्ट में खुली मोदी सरकार की पोल

Wed, 10 Sep 2014 07:56 AM IST
Updated Wed, 10 Sep 2014 07:56 AM IST
विज्ञापन
delhi high court on e rickshaw ban

ई-रिक्शा को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां जोरों पर है और हर पार्टी इस मुद्दे को लेकर राजनीति में लिप्त है। केंद्र सरकार ने भी ई-रिक्शा को चलाने के लिए कोई कानून बनाने की पहल करने की अपेक्षा अदालत से चलाने की इजाजत मांग ली लेकिन अदालत ने भी गेंद फिर सरकार के पाले में डाल दी।

विज्ञापन


अदालत ने स्पष्ट किया कि मोटर वाहन को चलाने व न चलाने के लिए संसद ने कानून बनाया है अदालत उस कानून में संशोधन कैसे कर सकती है।

न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ ने अपने फैसले में पूरे मामले में केंद्र सरकार की भूमिका पर भी कई सवाल उठाए है। अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार ने ई-रिक्शा को चलाने की इजाजत तो प्रदान कर दी लेकिन कोई भी कानून नहीं बनाया। केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, परिवहन विभाग, दिल्ली पुलिस, ई-रिक्शा चालक संघ व अन्य हर पक्ष ने माना कि संचालन गैरकानूनी है।
विज्ञापन


केंद्र सरकार ने तीन कमेटियां बनाई व कमेटी ने रिपोर्ट में ई-रिक्शा के पंजीकरण, बीमा व ड्राइविंग लाईसेंस के अलावा संचालन, रखरखाव, नियंत्रण, अपराध इत्यादि के लिए नियम बनाने को कहा लेकिन किया कुछ नहीं गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

सरकार के काम पर अदालत का सवाल

delhi high court on e rickshaw ban

केंद्र सरकार पुनर्विचार में पक्ष नहीं था लेकिन केंद्र सरकार की अधिवक्ता ने बतौर पेश होकर उनकी तरफ से जिरह की। सरकार ने तर्क रखा कि हजारों परिवार की जीविका का सवाल है लेकिन सरकार ने संसद के जरिए कानूनी बनाने की दिशा में प्रयास नहीं किया।

अदालत ने कहा कि संसद ने कानूनी बनाकर गैरकानूनी रूप से मोटर वाहन चलाने पर प्रतिबंध लगाया है लेकिन सरकार हमसे संसद द्वारा जिस पर प्रतिबंध लगाया है उसी को चलाने की इजातज मांग रही है। हमें यह समझ नहीं आ रहा कि सरकार कैसे कह सकती है कि हमें ऐसा आदेश देने का अधिकार है।

खंडपीठ ने कहा कि हम कानून के रचनाकार नहीं है और न ही कानून बना सकते है लेकिन स्पष्ट कर देते है कि कानून के सरंक्षक है। खंडपीठ ने कहा कि हम कानून में किसी भी बदलाव के बारे में तो कुछ कह नहीं सकते और ई रिक्शा के लिए नियम बनाने का मसला केंद्र सरकार पर छोड़ते हैं।

दो साल पहले जारी हुआ था बैन का नोटिस

delhi high court on e rickshaw ban

ई-रिक्शा को अवैध बताते हुए हाईकोर्ट ने जो पाबंदी अब लगाई है, दिल्ली परिवहन विभाग इस बारे में दो साल पहले से जानता था। यही वजह है कि दिसंबर 2012 में विभाग ने एक अंग्रेजी अखबार में पब्लिक नोटिस जारी कर तत्काल प्रभाव से ई-रिक्शा की बिक्री और संचालन पर रोक लगा दी थी।

नोटिस में कहा गया था कि ई-रिक्शा सेंट्रल मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 का उल्लंघन करता है। ई-रिक्शा बगैर वैध पंजीकरण के सड़कों पर दौड़ रहे हैं।

इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग (आईएफटीआरआई ) के वरिष्ठ रिसर्चर एसपी सिंह के मुताबिक जब यह नोटिस जारी किया गया था तब सड़कों पर महज कुछ सौ ई-रिक्शा ही थे, लेकिन इस पर ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण आज सड़कों पर लाखों ई-रिक्शा हो गए और हाईकोर्ट को इस पर सख्त कदम उठाना पड़ा।

उन्होंने कहा कि बिना किसी फिटनेस मानक के सड़कों पर दौड़ रहे ई-रिक्शा पर दिल्ली ही नहीं, पूरे देश में पाबंदी लगानी चाहिए। परिवहन विभाग ने 2012 में जारी पब्लिक नोटिस में कहा था कि ई-रिक्शा के पास न तो टाइप अप्रूवल है और न ही फिटनेस सर्टिफिकेट। इसके बाद 2013 और फिर 2014 में विभाग ने पब्लिक नोटिस जारी कर इस पर पाबंदी का आदेश दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed