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Delhi High Court: महिला उत्पीड़न की FIR पर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, पुलिस की भाषा पर जताई आपत्ति
Fri, 02 Jan 2026 06:37 PM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: अनुज कुमार
Updated Fri, 02 Jan 2026 06:37 PM IST
सार
दिल्ली हाईकोर्ट ने महिलाओं की शील भंग से जुड़े मामलों में सुनवाई की। कोर्ट ने प्राथमिकी दर्ज करते समय पुलिस द्वारा 'हाथ मारा' जैसे विशेष हिंदी वाक्यांश के उपयोग पर कड़ी आपत्ति जताई है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस थानों को इस प्रथा पर आत्मनिरीक्षण करने की आवश्यकता है।
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दिल्ली हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने महिलाओं की शील भंग करने से संबंधित अपराधों में दर्ज होने वाली हर प्राथमिकी में एक विशेष हिंदी वाक्यांश 'हाथ मारा' का उपयोग करने की पुलिस की प्रथा पर कड़ी आपत्ति जताई है। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने इसे कानून का घोर दुरुपयोग करार देते हुए कहा कि यह प्रथा पुलिस थानों में गहन आत्मनिरीक्षण की मांग करती है।
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अदालत शराब के नशे में एक महिला इवेंट मैनेजर पर हमला करने और उसे नाचने के लिए मजबूर करने के आरोप में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। न्यायाधीश ने कहा यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (महिला की शील भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल प्रयोग) के तहत दर्ज हर प्राथमिकी में हाथ मारा शब्द लिखे जा रहे हैं, जो शिकायतकर्ता द्वारा समर्थित नहीं होते।
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यह कानून का दुरुपयोग है और पुलिस थानों के स्तर पर आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता है। अदालत ने संबंधित उप पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि शिकायतों में कोई मनगढ़ंत आरोप न जोड़े जाएं।
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मामले में शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी व्यक्तियों ने शराब के नशे में उस पर हमला किया और उसे उनके साथ नाचने के लिए कहा। इसके आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 126(2) (गलत तरीके से रोकना), 74 (महिला की शील भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल) और 3(5) (साझा इरादा) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। दोनों पक्षों में समझौते के बाद अदालत ने प्राथमिकी रद्द कर दी।