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अमेजन और फ्लिपकार्ट से जुड़ी बड़ी खबर, हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 30 Jul 2018 09:11 PM IST
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फाइल फोटो
हाईकोर्ट ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के कथित उल्लंघन के मामले में केंद्र सरकार, अमेजन व फ्लिप कार्ट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका दायर कर इन दोनों ई-कामर्स कंपनियों पर एफडीआई की शर्तों के उल्लंघन का आरोप एनजीओ ने लगाते हुए जांच की मांग की है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति गीता मित्तल व न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की खंडपीठ ने केंद्र, अमेजन व फ्लिप कार्ट को नोटिस जारी कर 11 नवंबर तक पक्ष रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह नोटिस एनजीओ टेलीकॉम वॉचडॉग की याचिका पर जारी किया है।
एनजीओ की ओर से अधिवक्ता प्रणव सचदेवा ने याचिका दायर कर इन ई-कामर्स कंपनियों के खिलाफ विदेशी विनिमय प्रबंध अधिनियम (फेमा) के प्रावधानों व एफडीआई की शर्तों के कथित उल्लंघन के लिए कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
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याचिका में कहा गया है कि इन कंपनियों ने एफडीआई की शर्तों से बचने के लिए कई छोटी कंपनियों का निर्माण कर लिया है और यह कंपनियां भारी मांग वाली वस्तुओं को कम दाम पर बेच रही है।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति गीता मित्तल व न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की खंडपीठ ने केंद्र, अमेजन व फ्लिप कार्ट को नोटिस जारी कर 11 नवंबर तक पक्ष रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह नोटिस एनजीओ टेलीकॉम वॉचडॉग की याचिका पर जारी किया है।
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एनजीओ की ओर से अधिवक्ता प्रणव सचदेवा ने याचिका दायर कर इन ई-कामर्स कंपनियों के खिलाफ विदेशी विनिमय प्रबंध अधिनियम (फेमा) के प्रावधानों व एफडीआई की शर्तों के कथित उल्लंघन के लिए कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
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याचिका में कहा गया है कि इन कंपनियों ने एफडीआई की शर्तों से बचने के लिए कई छोटी कंपनियों का निर्माण कर लिया है और यह कंपनियां भारी मांग वाली वस्तुओं को कम दाम पर बेच रही है।
इससे देश के छोटे कारोबारियों के लिए ई-कामर्स के बढ़ते कारोबार में हिस्सेदारी करना बेहद मुश्किल हो गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह कंपनियां 2016 के प्रेस नोट तीन से नियंत्रित होती हैं।
उसके मुताबिक ई-कॉमर्स कंपनियां अपना स्टॉक नहीं खरीदेंगी और न ही खुले बाजारों में उपलब्ध वस्तुओं व सेवाओं के दामों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करेंगी।
एनजीओ का कहना है कि यह ई-काोमर्स कंपनियां सीधे उत्पादकों से बड़ी छूट पर माल खरीदती है और उसे सस्ते दाम पर ग्राहक को बेचती हैं। इससे छोटे कारोबारियों का मुनाफा बेहद प्रभावित हो रहा है। यह सीधे तौर पर एफडीआई की शर्तों का उल्लंघन है।
उसके मुताबिक ई-कॉमर्स कंपनियां अपना स्टॉक नहीं खरीदेंगी और न ही खुले बाजारों में उपलब्ध वस्तुओं व सेवाओं के दामों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करेंगी।
एनजीओ का कहना है कि यह ई-काोमर्स कंपनियां सीधे उत्पादकों से बड़ी छूट पर माल खरीदती है और उसे सस्ते दाम पर ग्राहक को बेचती हैं। इससे छोटे कारोबारियों का मुनाफा बेहद प्रभावित हो रहा है। यह सीधे तौर पर एफडीआई की शर्तों का उल्लंघन है।