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Delhi: सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों का शीघ्र हो निपटान, होईकोर्ट ने दिया निर्देश

Sun, 24 Dec 2023 06:06 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Sun, 24 Dec 2023 06:06 AM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने सांसद एवं विधायकों के खिलाफ संबंधित अदालतों में लंबित आपराधिक मुकदमे को शीघ्र प्रभावी ढंग से निपटाने का निर्देश दिया है।

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Delhi high court Instructions for speedy disposal of pending criminal cases
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने सांसद एवं विधायकों के खिलाफ संबंधित अदालतों में लंबित आपराधिक मुकदमे को शीघ्र प्रभावी ढंग से निपटाने का निर्देश दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन एवं न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने राऊज एवेन्यू कोर्ट के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि संबंधित अदालतों में लंबित सभी मुकदमों की गंभीरता को समान रूप से देखते हुए उसका निपटारा किया जाए।

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पीठ ने कहा कि जनसेवकों के खिलाफ लंबित मामलों को सप्ताह में कम से कम एक बार जरूर सूचीबद्ध किया जाए और जब तक अत्यंत आवश्यक न हो, उनमें स्थगन नहीं दिया जाए। अगर गवाह को दुबारा बुलाना पड़े तो उसे दूसरे दिन ही बुला लिया जाए और उसके मामले की कार्यवाही पूरी करने के बाद ही आगे की तारीख लगाया जाए।
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पीठ ने इसके अलावा प्रधान न्यायाधीश से कहा कि वे सभी अदालतों की हर महीने प्रगति रिपोर्ट भेजें और उसकी एक प्रति हाईकोर्ट को भी भेंजे। उस रिपोर्ट में महीने के दौरान मामलों में किए गए कार्य, तैयार की गई कार्य योजना और शीघ्र निपटान के लिए उठाए गए कदमों तथा विशिष्ट कारणों का भी संक्षिप्त उल्लेख करें। उसने इसके साथ ही सुनवाई 12 फरवरी के लिए स्थगित कर दी।
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कोर्ट ने कहा कि अगर किसी सत्र अदालत में कोई पुनरीक्षण याचिका लंबित है तो उसे छह महीने में निपटाने का प्रयास किया जाए। साथ ही सभी अदालतों में बुनियादी ढांचें मुहैया होना सुनिश्चित करें और उसकी भी रिपोर्ट भेजें। जिला जज सहित सभी सुनवाई करने वाले जज व केंद्रीय परियोजना समन्वयक (सीपीसी) यह भी सुनिश्चित करें कि तकनीकी बुनियादी ढांचा उपलब्ध हो।

सुनवाई की अगली तारीख से पहले स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें
कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन मामलों में मुकदमे पर रोक के आदेश पारित किए गए हैं और छह महीने से अधिक समय बीत गया है तो उसे शीघ्रता से निपटाएं। इसके अलावा रजिस्ट्रार जनरल सुनवाई की अगली तारीख से पहले उक्त मामलों की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें।

केंद्र के लिए सॉलिसिटर जनरल की राय को आरटीआई से छूट: हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने सीआईसी के 2011 के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें 2-जी स्पेक्ट्रम के आवंटन पर सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से दायर विभिन्न मामलों में 2007 में भारत के तत्कालीन सॉलिसिटर जनरल की केंद्र को दी राय का खुलासा करने का निर्देश दिया गया था।

अदालत ने माना कि ऐसी जानकारी को सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के प्रावधानों के तहत छूट दी गई है, सिवाय इसके कि जब इसका समर्थन करने के लिए मजबूत कारण हों कि इसका खुलासा सार्वजनिक हित में है। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश को केंद्र की चुनौती से निपटते हुए कहा कि सॉलिसिटर जनरल और भारत सरकार के बीच संबंध एक भरोसेमंद और लाभार्थी का है और इसलिए धारा 8 (1) के तहत इसे छोड़ दिया है। आरटीआई अधिनियम की धारा 8(2) के संदर्भ में राय का खुलासा केवल यदि प्रकटीकरण में सार्वजनिक हित संरक्षित हित को होने वाले नुकसान से अधिक है की अनुमति दी जा सकती है। अदालत ने कहा वर्तमान मामले में चूंकि आरटीआई आवेदक ने सार्वजनिक हित नहीं दिखाया है, इसलिए सीआईसी के आदेश को कायम नहीं रखा जा सकता।

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