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अखूंद जी मस्जिद: दिल्ली HC का DDA को मस्जिद भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश, 30 जनवरी को चला था बुलडोजर

Mon, 05 Feb 2024 05:33 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Mon, 05 Feb 2024 05:33 PM IST
सार

Mehrauli Masjid Demolition: डीडीए ने 30 जनवरी को संपत्तियों को अनधिकृत निर्माण बताते हुए मस्जिद, बहरुल उलूम मदरसा और विभिन्न कब्रों को तोड़ दिया था।

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Delhi High Court directs DDA to maintain status quo on Akhund Ji Masjid land of Mehrauli
महरौली की अखूंद जी मस्जिद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उच्च न्यायालय ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को महरौली इलाके में स्थित उस जमीन पर 12 फरवरी तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया, जिस पर 600 साल पुरानी अखूंद जी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया था। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने साथ ही स्पष्ट किया कि उसका आदेश नागरिक प्राधिकरण को क्षेत्र में अन्य अवैध संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने से नहीं रोकेगा।

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अदालत दिल्ली वक्फ बोर्ड की प्रबंध समिति द्वारा दायर उस याचिका पर विचार कर रही है जिसमें मस्जिद स्थित भूमि की यथास्थिति बनाए रखने की मांग की गई थी। डीडीए ने 30 जनवरी को संपत्तियों को अनधिकृत निर्माण बताते हुए मस्जिद, बहरुल उलूम मदरसा और विभिन्न कब्रों को तोड़ दिया था।

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31 जनवरी को हाई कोर्ट ने डीडीए से जवाब मांगा कि क्या उसने मस्जिद गिराने से पहले कोई पूर्व सूचना दी थी। अदालत ने कहा डीडीए को एक सप्ताह की अवधि के भीतर अपना जवाब दाखिल करने दें, जिसमें संबंधित संपत्ति के संबंध में की गई कार्रवाई और उसके आधार को स्पष्ट रूप से बताया जाए और क्या विध्वंस कार्रवाई करने से पहले कोई पूर्व सूचना दी गई थी। सोमवार को प्रबंध समिति ने कहा कि धार्मिक समिति के पास किसी भी विध्वंस कार्रवाई का आदेश देने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।

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2009 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी सार्वजनिक स्थानों से अनधिकृत धार्मिक संरचनाओं को ध्वस्त-स्थानांतरित करने के आदेश जारी किए और ऐसी संरचनाओं द्वारा किसी भी अन्य कब्जे पर रोक लगा दी। दिल्ली ने ऐसे मामलों पर विचार करने और सिफारिशें करने के लिए गृह सचिव की अध्यक्षता में एक धार्मिक समिति की स्थापना की। उन्होंने तर्क दिया कि डीडीए ने न केवल मस्जिद को ध्वस्त कर दिया, बल्कि कब्रिस्तान में दफन शवों को भी खोदा और कुरान की प्रतियों को क्षतिग्रस्त कर दिया।

डीडीए ने दलील दी कि चार जनवरी को धार्मिक समिति की सिफारिशों के अनुसार विध्वंस किया गया था, साथ ही दिल्ली वक्फ बोर्ड के सीईओ को भी फैसले से पहले सुनवाई का अवसर दिया गया था। कुरान को नुकसान पहुंचाने के आरोपों का खंडन करते हुए उन्होंने कहा कि वकील मामले को धार्मिक रंग देने की कोशिश कर रहे थे, क्योंकि धार्मिक पुस्तकों को सावधानी से संभाला गया था और वर्तमान में वे अधिकारियों की हिरासत में हैं।

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