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दिल्ली हाईकोर्ट: ईओडब्ल्यू के मामले में शिविंदर सिंह की जमानत रद्द, कहा- जांच के लिए हिरासत में रहना जरूरी
Mon, 14 Jun 2021 03:51 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Mon, 14 Jun 2021 03:51 PM IST
सार
जज सुरेश कुमार कैत ने आरएफएल की एक याचिका पर यह फैसला दिया। इस याचिका में शिवंदर मोहन सिंह को जमानत देने के निचली अदालत के तीन मार्च के निचली अदालत आदेश को चुनौती दी गई थी।
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शिविंदर मोहन सिंह
- फोटो : social media
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने रेलीगेयर फिनवेस्ट लिमिटिड (आरएफएल) के धन के गबन के मामले में शिविंदर मोहन सिंह की जमानत सोमवार को खारिज करते हुए कहा कि उसके द्वारा रची गई साजिश और गबन किए गए पैसे का पता लगाने के लिए उसे हिरासत में रखना जरूरी है।
जज सुरेश कुमार कैत ने आरएफएल की एक याचिका पर यह फैसला दिया। इस याचिका में शिवंदर मोहन सिंह को जमानत देने के निचली अदालत के तीन मार्च के निचली अदालत आदेश को चुनौती दी गई थी। आर्थिक अपराध इकाई (ईओडब्ल्यू) ने सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और आपराधिक विश्वासघात का मामला दर्ज किया है।
आरएफएल की याचिका को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में, प्रतिवादी संख्या दो (शिविंदर) के खिलाफ आरोपों की प्रकृति और गंभीरता संगीन है। जस्टिस कैत ने निचली अदालत से शिविंदर को मिली जमानत को खारिज करते हुए 29 पन्नों के फैसले में कहा कि धोखाधाड़ी, एक एजेंट द्वारा इतने पैसे के हितों के आपराधिक उल्लंघन के मामले में जमानत देना, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों पर प्रभाव पड़ता हो, उससे न सिर्फ मामले की प्रगति प्रभावित होती है बल्कि आपराधिक न्याय प्रणाली पर भी असर पड़ता है।
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उन्होंने कहा, मौजूदा मामले के तथ्यों और विभिन्न फैसलों में उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए, मुझे यह मानने में कोई संकोच नहीं है कि जिस आदेश को चुनौती दी गई है, उसमें गंभीर कमियां हैं जिस वजह से अन्याय हुआ।
न्यायमूर्ति कैत ने कहा, इससे भी ज्यादा इस प्राथमिकी में प्रतिवादी संख्या दो (सिंह) को हिरासत में रखना न सिर्फ उसके द्वारा रची गई साजिश का पता लगाने के लिए जरूरी है, बल्कि गबन किए गए पैसे का पता लगाने के लिए भी आवश्यक है जो उसने अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए जमा कराए।”
आरएफएल के अधिकृत प्रतिनिधि मनप्रीत सूरी ने शिविंदर, रेलीगेर एंटरप्राइजेस लिमिटिड (आरईएल) के पूर्व सीएमडी सुनील गोधवानी और आरईएल के पूर्व सीईओ कवि अरोड़ा एवं अन्य के खिलाफ दिल्ली पुलिस को शिकायत की और आरोप लगाया कि जब वे कंपनी का प्रबंधन संभाल रहे थे तब कर्ज लिया गया था जिसका निवेश अन्य कंपनियों में किया गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस की ईओडब्ल्यू ने मार्च 2019 में प्राथमिकी दर्ज की।
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जज सुरेश कुमार कैत ने आरएफएल की एक याचिका पर यह फैसला दिया। इस याचिका में शिवंदर मोहन सिंह को जमानत देने के निचली अदालत के तीन मार्च के निचली अदालत आदेश को चुनौती दी गई थी। आर्थिक अपराध इकाई (ईओडब्ल्यू) ने सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और आपराधिक विश्वासघात का मामला दर्ज किया है।
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आरएफएल की याचिका को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में, प्रतिवादी संख्या दो (शिविंदर) के खिलाफ आरोपों की प्रकृति और गंभीरता संगीन है। जस्टिस कैत ने निचली अदालत से शिविंदर को मिली जमानत को खारिज करते हुए 29 पन्नों के फैसले में कहा कि धोखाधाड़ी, एक एजेंट द्वारा इतने पैसे के हितों के आपराधिक उल्लंघन के मामले में जमानत देना, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों पर प्रभाव पड़ता हो, उससे न सिर्फ मामले की प्रगति प्रभावित होती है बल्कि आपराधिक न्याय प्रणाली पर भी असर पड़ता है।
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उन्होंने कहा, मौजूदा मामले के तथ्यों और विभिन्न फैसलों में उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए, मुझे यह मानने में कोई संकोच नहीं है कि जिस आदेश को चुनौती दी गई है, उसमें गंभीर कमियां हैं जिस वजह से अन्याय हुआ।
न्यायमूर्ति कैत ने कहा, इससे भी ज्यादा इस प्राथमिकी में प्रतिवादी संख्या दो (सिंह) को हिरासत में रखना न सिर्फ उसके द्वारा रची गई साजिश का पता लगाने के लिए जरूरी है, बल्कि गबन किए गए पैसे का पता लगाने के लिए भी आवश्यक है जो उसने अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए जमा कराए।”
आरएफएल के अधिकृत प्रतिनिधि मनप्रीत सूरी ने शिविंदर, रेलीगेर एंटरप्राइजेस लिमिटिड (आरईएल) के पूर्व सीएमडी सुनील गोधवानी और आरईएल के पूर्व सीईओ कवि अरोड़ा एवं अन्य के खिलाफ दिल्ली पुलिस को शिकायत की और आरोप लगाया कि जब वे कंपनी का प्रबंधन संभाल रहे थे तब कर्ज लिया गया था जिसका निवेश अन्य कंपनियों में किया गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस की ईओडब्ल्यू ने मार्च 2019 में प्राथमिकी दर्ज की।