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पूर्वोत्तर के लोगों पर हमले में वृद्धि एक बड़ी साजिश!
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 12 Feb 2014 05:06 PM IST
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राजधानी में पूर्वोत्तर के लोगों पर हमलों में अचानक वृद्धि पर हाईकोर्ट ने सरकार ने पूछा है कि इसकी तह तक जाने के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं। अदालत ने इस मुद्दे पर दिल्ली पुलिस को भी जांच करने का निर्देश दिया।
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मुख्य न्यायाधीश एनवी रामना व न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ की खंडपीठ ने सरकार से नॉर्थ ईस्ट की कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल बनाने को कहा।
अदालत ने कहा कि यह तथ्य भी सामने आया है कि मकान मालिकों के साथ नॉर्थ ईस्ट के लोगों के झगड़े बढ़ रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार को कामकाजी महिला हॉस्टल बनाने पर विचार करना चाहिए।
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मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा कि पूर्वोत्तर के लोगों पर हमलों में अचानक वृद्धि के पीछे कहीं कोई गहरा षडयंत्र तो नहीं है। अदालत ने कहा कि हर व्यक्ति को सुरक्षा प्रदान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
इस मुद्दे पर सरकार की क्या राय है। अब तक उसने क्या एक्शन प्लान बनाया है। नॉर्थ-ईस्ट के लोगों की ओर से पेश उपमन्यु हजारिका ने अदालत को बताया कि भाषा की समस्या के कारण 100 नंबर पर शिकायत करने पर कार्रवाई नहीं होती। इतना ही नहीं अंग्रेजी में भी कोई बात नहीं समझ पाता।
दिल्ली पुलिस की ओर से कोर्ट में पेश अतिरिक्तसॉलीसिटर जनरल सिद्धार्थ लूथरा ने बताया कि नॉर्थ-ईस्ट के लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए स्पेशल पुलिस यूनिट का गठन किया गया है। इसके अलावा छह सप्ताह में एक हेल्पलाइन जारी कर दी जाएगी।
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वहीं केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने इन लोगों की सुरक्षा के लिए नए दिशा निर्देश पेश नहीं किए। उन्होंने इसके लिए बुधवार तक का समय मांग लिया। उन्होंने कहा कि हरियाणा व यूपी सरकार को नॉर्थ-ईस्ट के लोगों की सुरक्षा के विशेष उपाय करने का निर्देश दे दिया गया है।
किराए के भवन में लैब बनाई जाएं
हाईकोर्ट ने भूमि के अभाव में फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला न बनाने के तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा जब तक भूमि उपलब्ध नहीं होती तब तक किराए के भवन में तत्काल लैब बनाई जाए।