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डीयू में 10 अगस्त से ही होगी ओपन बुक परीक्षा, दिल्ली हाईकोर्ट ने दी अनुमति

Fri, 07 Aug 2020 12:34 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Fri, 07 Aug 2020 12:34 PM IST
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Delhi University Exam 2020: Delhi high court allows to conduct open book exams in delhi university
दिल्ली विश्वविद्यालय की परीक्षा:10 अगस्त से ही होगी

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय में ओपन बुक परीक्षा आयोजित करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को अनुमति दे ही है। डीयू प्रशासन ने कोर्ट में जानकारी दी है कि वह यूजीसी के दिशा-निर्देशों के तहत ही परीक्षा करवाएगा। यह परीक्षाएं तय समय यानी 10 अगस्त से ही होंगी।

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इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने अंतिम वर्ष के पाठ्यक्रमों के लिए 10 अगस्त से ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षा कराने के दिल्ली विश्वविद्यालय के फैसले को बरकरार रखा है। उच्च न्यायालय ने कुछ दिशा निर्देश जारी किए हैं, जिनका दिल्ली विश्वविद्यालय को ओपन बुक परीक्षाओं के दौरान पालन करना होगा, उससे परीक्षाएं कराने के बाद अदालत को रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा।
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हाईकोर्ट ने डीयू की दलीलें सुनने के बाद पांच अगस्त को सुरक्षित रख लिया था फैसला 
दिल्ली हाईकोर्ट में बुधावार को डीयू प्रशासन ने कहा था कि ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षा आयोजित करने का उद्देश्य छात्रों को कोविड-19 महामारी के समय में सामाजिक दूरी के दिशा निर्देशों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। डीयू प्रशासन ने कहा कि सामान्य परीक्षा आयोजित करके एक हॉल में छात्रों के बीच सामाजिक दूरी का पालन करना बेहद मुश्किल है।
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न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह के समक्ष डीयू की ओर से पेश वकील सचिन दत्ता ने कहा कि ओबीई के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, चूंकि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने ओबीई आयोजित करने की अनुमति दी है और इस संबंध में सुनवाई जारी है। उन्होंने कोरोना महामारी के समय में सामाजिक दूरी के प्रावधानों को लागू करना सबसे ज्यादा जरूरी है। पीठ ने डीयू, यूजीसी, याचिकाकर्ताओं और हस्तक्षेपकर्ता की दलीलें सुनने के बाद इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सुनवाई के दौरान डीयू के वकील ने कहा कि ओबीई में शामिल होने के लिए छात्रों को बेहद उच्च तकनीक की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने कहा कि परीक्षा में शामिल होने के लिए एक ईमेल होना भी पर्याप्त होगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जो छात्र इस परीक्षा में शामिल नहीं होना चाहते या परीक्षा में शामिल नहीं हो सकते, उनके लिए सितंबर में सामान्य परीक्षा आयोजित की जाएगी।

तब वे छात्र उस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। इसके साथ ही वकील ने कोर्ट से कहा कि परीक्षा के नतीजे भी जल्द घोषित किए जाएंगे, ताकि छात्रों को आगे की पढ़ाई करने के लिए परेशानी का सामना ना करना पड़े।


हस्तक्षेपकर्ता की ओर से पेश वकील शिवांकर शर्मा ने दलील दी कि ओबीई को बिना किसी आधार पर चुना गया है और यह किसी परीक्षा का माध्यम नहीं है। उन्होंने दावा किया कि यह फैसला मनमाना और बिना सोचे समझे लिया गया है, लिहाजा आबीई की अधिसूचना को रद्द करने के लिए निर्देश दिए जाएं।

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