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1993 विमान अपहरण मामला: दिल्ली HC ने दोषी की रिहाई पर पुनर्विचार का दिया आदेश, 8 सप्ताह के भीतर होगा नया फैसला
Sat, 26 Jul 2025 04:00 PM IST
श्याम जी.
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: श्याम जी.
Updated Sat, 26 Jul 2025 04:00 PM IST
सार
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1993 के विमान अपहरण मामले में दोषी हरि सिंह की समयपूर्व रिहाई को खारिज करने वाले सजा समीक्षा बोर्ड के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने बोर्ड को आठ सप्ताह में नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया, क्योंकि सिंह का जेल आचरण सुधार दर्शाता है।
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1993 में इंडियन एयरलाइंस की 192 यात्रियों से भरी उड़ान के अपहरण के दोषी हरि सिंह की समयपूर्व रिहाई को खारिज करने वाले सजा समीक्षा बोर्ड (एसआरबी) के फैसले को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने मामले को नए सिरे से विचार के लिए एसआरबी को वापस भेजते हुए आठ सप्ताह के भीतर नया फैसला सुनाने का निर्देश दिया।
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7 जुलाई के अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने कहा कि एसआरबी का फैसला अपर्याप्त तर्कों और दोषी के जेल में आचरण व सुधार से संबंधित न्यायिक टिप्पणियों पर विचार न करने के कारण टिकाऊ नहीं है। अदालत ने कहा कि हरि सिंह का जेल में आचरण सुधार के संकेत देता है, क्योंकि लगभग 18 वर्ष की वास्तविक कारावास के दौरान उनके खिलाफ कोई अप्रिय घटना दर्ज नहीं हुई है, जो यह दर्शाता हो कि उनमें अभी भी आपराधिक प्रवृत्ति बनी हुई है। हरि सिंह को अपहरण विरोधी अधिनियम की धारा 4 और भारतीय दंड संहिता की धारा 353, 365 और 506(II) के तहत दोषी ठहराया गया था।
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2001 में निचली अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। 2011 में उच्च न्यायालय ने उनकी अपील खारिज कर दी थी, और सर्वोच्च न्यायालय से उनकी विशेष अनुमति याचिका वापस ले ली गई थी। सिंह ने दावा किया था कि उनकी समयपूर्व रिहाई के लिए कई बार विचार किया गया, लेकिन अपराध की गंभीरता के आधार पर इसे बार-बार खारिज कर दिया गया। 12 मई 2025 तक, सिंह ने 17 वर्ष, 11 महीने और छह दिन की वास्तविक कारावास और छूट सहित कुल 22 वर्ष, छह महीने और 20 दिन की सजा काट ली थी।
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अदालत ने कहा कि एसआरबी द्वारा सिंह के आवेदन को खारिज करने के लिए दिए गए तर्क अपर्याप्त थे और प्रशासनिक आदेश के लिए आवश्यक औचित्य के मानकों को पूरा नहीं करते। इसके साथ ही, अदालत ने 24 अप्रैल 2025 की एसआरबी बैठक के कार्यवृत्त को रद्द कर दिया और बोर्ड को मामले पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया। यह फैसला हरि सिंह को राहत प्रदान करता है, जिनके जेल में अच्छे आचरण को अदालत ने सुधार का संकेत माना है। अब एसआरबी को आठ सप्ताह के भीतर इस मामले पर नए सिरे से विचार करना होगा।