नजमा की वजह से कटघरे में मोदी सरकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली हाईकोर्ट ने देश के प्रथम शिक्षा मंत्री पर प्रकाशित एक पुस्तक में मौलाना अबुल कलाम आजाद और नजमा हेपतुल्ला की कथित तस्वीर के मामले की जांच के मुद्दे पर केंद्र सरकार, सीबीआई व भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया है।
न्यायमूर्ति विभू बाखरू ने सभी पक्षों को 7 नवंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह निर्देश आजाद के पोते फिरोज बख्त अहमद द्वारा दायर याचिका के आधार पर जारी किया है।
याची का आरोप है कि फोटो स्वयं हेपतुल्ला के इशारे पर लगाई गई है, क्योंकि वे भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) की अध्यक्ष हैं। फोटो में भारत के पहले शिक्षा मंत्री के जीवन पर आईसीसीआर द्वारा प्रकाशित ‘जर्नी ऑफ ए लीजेंड ऑन द लाइफ ऑफ इंडिया’ पुस्तक में विवादित फोटो में हेपतुल्ला के साथ आजाद को बैठे दिखाया गया है।
दें जवाब, कहां तक पहुंची जांच
विवाद के बाद आईसीसीआर ने उक्त फोटो को हटा दिया। यह फोटो हेपतुल्ला के स्नातक की डिग्री मिलने के दौरान दिखाई गई है। मई 1958 को स्नातक की उपाधि प्राप्त हुई थी जबकि आजाद का 22 फरवरी 1958 को निधन हो गया था।
ऐसे में फोटो कैसे खींची जा सकती है। अत: पूरे मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया जाए।
वहीं, याची के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि अदालत ने 5 जुलाई 2006 को भी सीबीआई को जांच करके ठोस नतीजे पर पहुंचने का निर्देश दिया था, लेकिन अभी तक सीबीआई की आरंभिक जांच भी पूरी नहीं हुई। ऐसे में सीबीआई को स्पष्ट करने का निर्देश दिया जाए कि अभी तक जांच कहां तक पहुंची है।
तोड़फोड़ पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
आदेश के बावजूद कर्बला भूमि पर तोड़फोड़ के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने दोनों पक्षों को शांति बनाए रखने की चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी हालत में माहौल खराब करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। अदालत ने पूरे समारोह की विडियोग्राफी करने के अलावा केंद्र सरकार व पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था के उचित कदम उठाने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ के समक्ष कर्बला भूमि प्रबंधन अंजुमन-ए-हैदरी के अधिवक्ता ने मंगलवार को आरोप लगाया कि सोमवार को जब अदालत में सुनवाई चल रही थी तो कर्बला पर बने नकारखाने को ध्वस्त कर दिया गया। कुछ लोगों ने पत्थरबाजी की। शरारती तत्व किसी भी हालत में अदालत के आदेश को लागू नहीं होने देना चाहते।
पुलिस भी कुछ नहीं कर रही, बल्कि पत्थरबाजी करने वालों का साथ दे रही है। उधर, दिल्ली पुलिस के अधिवक्ता ने कहा कि नकारखाने व अन्य स्थानों पर हैदरी प्रबंधन ने पर्दा लगा रखा है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था के अलावा विडियोग्राफी संभव नहीं है। हम शांति बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि क्षेत्र में हर हाल में शांति बनाई जानी चाहिए। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि हैदरी प्रबंधन द्वारा समारोह स्थल पर टैंट लगाए जाने से पहले और बाद में विडियोग्राफी करवाई जाए। इसके बाद टैंट हटाने के बाद स्थल की विडियोग्राफी करवाई जाए।