हाईकोर्ट ने मांगा मकसूद की 'मौत का वीडियो'
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राजधानी के चिड़ियाघर में बाघ के हमले में मारे गए मकसूद के परिजनों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है। याचिका के आधार पर कोर्ट ने सोमवार को नेशनल जूलॉजिकल पार्क के निदेशक, सेंट्रल जू अथॉरिटी, केंद्र, दिल्ली सरकार और पुलिस को नोटिस जारी किया।
न्यायमूर्ति विभू बाखरू ने सभी को पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के अलावा यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि क्यों पीड़ित परिवार को मुआवजा देने का आदेश दिया जाए।
कोर्ट ने चार सप्ताह में अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 18 दिसंबर तय कर दी। अदालत ने टीवी चैनलों को मामले से संबंधित दिखाई गई फुटेज भी पेश करने को कहा है।
क्या चाहती मकसूद की पत्नी फातिमा
याचिका मकसूद की पत्नी फातिमा ने दायर की है। याची के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि चिड़ियाघर में 23 सितंबर को हुई घटना में जू प्रशासन की लापरवाही थी। उन्होंने कहा कि बाघ के बाडे़ में गिरते ही मकसूद की टांग टूट गई थी और वह चलने में असहाय हो गया था।
मकसूद बाघ के समक्ष 15 से 20 मिनट तक जीवन की भीख मांगता रहा, लेकिन इस बीच जू प्रशासन ने उसे बचाने का कोई प्रयास नहीं किया। प्रशासन के पास युवक को बचाने के ठोस साधन नहीं थे। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन मकसूद के जीवन को बचाने की जिम्मेदारी निभाने में असफल रहा।
यह सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामी है। अधिवक्ता ने कहा कि मकसूद परिवार में भरण पोषण करने का एक मात्र व्यक्ति था। याची सात माह से गर्भवती है। सुरक्षा में लापरवाही के कारण सरकार मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार है।
इसलिए उसे पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया जाए। गौरतलब है कि चिड़ियाघर में खामियों व मुआवजा दिलाने को लेकर दायर दो अन्य याचिकाएं भी कोर्ट में विचाराधीन हैं।