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Delhi NCR News: दिल्ली को बनाना होगा भविष्य की वैश्विक राजधानीः उपराज्यपाल
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जेएनयू का पूर्व छात्र होने के नाते उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू को प्रशासन ने किया सम्मानित
दिल्ली का भविष्य केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं बल्कि शहरी जीवन के समग्र अनुभव को बेहतर बनाने पर केंद्रित होना चाहिएः उपराज्यपाल
स्वच्छ हवा, यमुना नदी के पुनर्जीवन, हरित क्षेत्र बढ़ाने, कचरा प्रबंधन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी है प्राथमिकताःउपराज्यपाल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली केवल भारत की राजनीतिक राजधानी नहीं, बल्कि एक जीवंत सभ्यतागत विरासत है, जिसे भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना होगा। इंद्रप्रस्थ से लेकर शाहजहानाबाद और आधुनिक नई दिल्ली तक राजधानी ने समय-समय पर खुद को पुनर्परिभाषित किया है। जब भारत दुनिया में अपनी भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। तब उसकी राजधानी के भविष्य के बारे में सोचना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह बातें शुक्रवार को दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में री इमेजिंग दिल्ली कार्यक्रम में कहीं।
जेएनयू के पूर्व छात्र होने के नाते उपराज्यपाल को प्रशासन ने सम्मानित भी किया। उपराज्यपाल ने कहा कि दिल्ली का भविष्य केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं बल्कि शहरी जीवन के समग्र अनुभव को बेहतर बनाने पर केंद्रित होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने पांच प्रमुख स्तंभ स्थिरता, समावेशन, संस्कृति, नवाचार व आर्थिक विकास और करुणा का हवाला दिया। पर्यावरण के मुद्दे पर उन्होंने स्वच्छ हवा, यमुना नदी के पुनर्जीवन, हरित क्षेत्र बढ़ाने, कचरा प्रबंधन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता देने की बात कहीं।
समावेशन के तहत महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों, छात्रों और श्रमिकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत, संग्रहालयों, कला, साहित्य और पर्यटन को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। साथ ही स्टार्टअप, डिजिटल इकोसिस्टम और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देकर दिल्ली को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की बात कही। किसी भी शहर की असली पहचान इस बात से होती है कि वह अपने कमजोर और वंचित लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है। दिल्ली को संवेदनशील, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार राजधानी बनाने की जिम्मेदारी सभी की है।
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तरनजीत सिंह संधू ने छात्र जीवन की यादों को साझा करते हुए 25 पैसे में मिलने वाली मट्टू स्पेशल चाय के बारे में छात्रों को बताया। साथ ही कहा कि जेएनयू ने उनके विचारों को आकार, सोच को चुनौती दी और उन्हें व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया। जेएनयू कुलगुरु शांतिश्री डी पंडित ने कहा कि जेएनयू के पूर्व छात्र आज शिक्षा, कूटनीति, प्रशासन और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। जेएनयू की संस्कृति विकास, चर्चा, धरना, लोकतंत्र, विचार-विमर्श, शालीनता, विविधता सहित दूसरे मूल्यों से परिभाषित होती है।
सीयूईटी पीजी जैसे पहलों के माध्यम से विश्वविद्यालय में विकास को नई दिशा मिली है। परिसर में किसी भी प्रकार की हिंसा के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति पर कुलगुरु ने जोर दिया। जेएनयू के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के डीन प्रोफेसर अमिताभ मट्टू ने नवाचार के क्षेत्र में जेएनयू द्वारा विकसित एआई आधारित ट्रैफिक रेगुलेशन सिस्टम का भी उल्लेख किया। जिसे तकनीक आधारित शहरी प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया गया।
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दिल्ली का भविष्य केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं बल्कि शहरी जीवन के समग्र अनुभव को बेहतर बनाने पर केंद्रित होना चाहिएः उपराज्यपाल
स्वच्छ हवा, यमुना नदी के पुनर्जीवन, हरित क्षेत्र बढ़ाने, कचरा प्रबंधन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी है प्राथमिकताःउपराज्यपाल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली केवल भारत की राजनीतिक राजधानी नहीं, बल्कि एक जीवंत सभ्यतागत विरासत है, जिसे भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना होगा। इंद्रप्रस्थ से लेकर शाहजहानाबाद और आधुनिक नई दिल्ली तक राजधानी ने समय-समय पर खुद को पुनर्परिभाषित किया है। जब भारत दुनिया में अपनी भूमिका को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। तब उसकी राजधानी के भविष्य के बारे में सोचना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह बातें शुक्रवार को दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में री इमेजिंग दिल्ली कार्यक्रम में कहीं।
जेएनयू के पूर्व छात्र होने के नाते उपराज्यपाल को प्रशासन ने सम्मानित भी किया। उपराज्यपाल ने कहा कि दिल्ली का भविष्य केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं बल्कि शहरी जीवन के समग्र अनुभव को बेहतर बनाने पर केंद्रित होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने पांच प्रमुख स्तंभ स्थिरता, समावेशन, संस्कृति, नवाचार व आर्थिक विकास और करुणा का हवाला दिया। पर्यावरण के मुद्दे पर उन्होंने स्वच्छ हवा, यमुना नदी के पुनर्जीवन, हरित क्षेत्र बढ़ाने, कचरा प्रबंधन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता देने की बात कहीं।
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समावेशन के तहत महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों, छात्रों और श्रमिकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत, संग्रहालयों, कला, साहित्य और पर्यटन को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। साथ ही स्टार्टअप, डिजिटल इकोसिस्टम और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देकर दिल्ली को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की बात कही। किसी भी शहर की असली पहचान इस बात से होती है कि वह अपने कमजोर और वंचित लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है। दिल्ली को संवेदनशील, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार राजधानी बनाने की जिम्मेदारी सभी की है।
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तरनजीत सिंह संधू ने छात्र जीवन की यादों को साझा करते हुए 25 पैसे में मिलने वाली मट्टू स्पेशल चाय के बारे में छात्रों को बताया। साथ ही कहा कि जेएनयू ने उनके विचारों को आकार, सोच को चुनौती दी और उन्हें व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया। जेएनयू कुलगुरु शांतिश्री डी पंडित ने कहा कि जेएनयू के पूर्व छात्र आज शिक्षा, कूटनीति, प्रशासन और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। जेएनयू की संस्कृति विकास, चर्चा, धरना, लोकतंत्र, विचार-विमर्श, शालीनता, विविधता सहित दूसरे मूल्यों से परिभाषित होती है।
सीयूईटी पीजी जैसे पहलों के माध्यम से विश्वविद्यालय में विकास को नई दिशा मिली है। परिसर में किसी भी प्रकार की हिंसा के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति पर कुलगुरु ने जोर दिया। जेएनयू के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के डीन प्रोफेसर अमिताभ मट्टू ने नवाचार के क्षेत्र में जेएनयू द्वारा विकसित एआई आधारित ट्रैफिक रेगुलेशन सिस्टम का भी उल्लेख किया। जिसे तकनीक आधारित शहरी प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया गया।