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सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को खो चुकी है दिल्ली, केंद्र में भी रहे अहम भूमिका में
Thu, 08 Aug 2019 04:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा
नवनीत शरण, नई दिल्ली
नवनीत शरण, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 08 Aug 2019 04:59 AM IST
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सुषमा स्वराज की अंतिम यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली की सियासत में इन दिनों माहौल शून्य जैसा बन गया है। 18 दिन में दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के निधन से राजनीतिक गलियारे में सन्नाटा है। पहले कांग्रेस की दिग्गज शीला दीक्षित और फिर भाजपा की कद्दावर नेता सुषमा स्वराज के निधन के बाद कार्यकर्ताओं को अभिभावक खो देने जैसी अनुभूति हो रही है।
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सुषमा स्वराज के निधन के बाद दिल्ली ने अपने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को खो दिया। इनमें से तीन मदन लाल खुराना, शीला दीक्षित और सुषमा स्वराज एक साल में ही विदा हुए। डॉ. साहिब सिंह वर्मा का निधन वर्ष 2007 में हो गया था। वर्ष 1993 से 1996 तक मुख्यमंत्री रहे मदन लाल खुराना का निधन पिछले साल अक्तूबर में हुआ।
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दिल्ली का मुख्यमंत्री होने के साथ ही वे केंद्र और देश में राजनीति की धुरी रहे। दिल्ली के मुख्यमंत्री तो वे रहे ही, बाद में जब उनकी पार्टी की केंद्र में सरकार बनी तो वे केंद्रीय मंत्री की भी भूमिका में रहे।
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राजनीति के जानकारों की मानें तो दिल्ली के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों की विशेषता यह भी थी कि वे पार्टी लाइन से ऊपर थे। उन्हें विपक्षी भी उतना ही सम्मान देते थे, जितने अपनी पार्टी के कार्यकर्ता। उनके निधन पर भी सभी पार्टियों के नेता श्रद्धांजलि देने पहुंचे। शीला दीक्षित और सुषमा स्वराज महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती थीं।
कार्यक्रमों में भी वे महिलाओं को गले लगाकर उनकी समस्याएं जरूर सुनती थीं। साहिब सिंह वर्मा को छोड़कर तीनों पूर्व मुख्यमंत्री बाहरी थे। शीला दीक्षित पंजाब की थीं तो सुषमा स्वराज हरियाणा की। इसी तरह मदन लाल खुराना पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से दिल्ली आए थे।
दिल्ली के भी कम लोगों को पता होगा कि 1993 में दिल्ली विधानसभा बनने के पहले भी दिल्ली के दो मुख्यमंत्री रह चुके हैं। 1952-56 के बीच चौधरी ब्रह्म प्रकाश और गुरुमुख निहाल सिंह मुख्यमंत्री बने थे। ये दोनों कांग्रेस पार्टी के थे। 1956 से 1993 तक दिल्ली विधानसभा के स्थान पर मेट्रोपॉलिटन काउंसिल थी। इसके पहले चेयरमैन लालकृष्ण आडवाणी थे।