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Delhi: जीटीबी अस्पताल में बनेगा यमुनापार का पहला ट्रॉमा सेंटर, 250 बेड की होगी सुविधा; तैयारियों में तेजी

Sat, 18 Apr 2026 02:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा सोनम प्रतिहस्त, नई दिल्ली
सोनम प्रतिहस्त, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 18 Apr 2026 02:15 AM IST
सार

इसके लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई है और अब प्रशासनिक स्वीकृति का इंतजार है। प्रस्ताव के अनुसार करीब 245 करोड़ रुपये की लागत से इस सेंटर का निर्माण किया जाएगा, जिससे यमुनापार क्षेत्र के लाखों लोगों को सीधे लाभ मिलेगा।

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Delhi: GTB Hospital will have first trauma centre with 250 beds.
gtb hospital - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्वी दिल्ली के मरीजों को बड़ी राहत देने की दिशा में गुरु तेग बहादुर अस्पताल में 250 बेड के अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर के निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसके लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई है और अब प्रशासनिक स्वीकृति का इंतजार है। प्रस्ताव के अनुसार करीब 245 करोड़ रुपये की लागत से इस सेंटर का निर्माण किया जाएगा, जिससे यमुनापार क्षेत्र के लाखों लोगों को सीधे लाभ मिलेगा।

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अस्पताल सूत्रों के मुताबिक ट्रॉमा सेंटर में लगभग 75 आईसीयू बेड के साथ इमरजेंसी, एचडीयू और सामान्य वॉर्ड भी विकसित किए जाएंगे। सभी बेड आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम, वेंटिलेटर और अन्य उन्नत मशीनों से लैस होंगे, जिससे गंभीर मरीजों की निरंतर निगरानी और उपचार संभव हो सकेगा। इसके अलावा यहां 24 घंटे लैब, सीटी स्कैन और एक्स-रे जैसी जरूरी जांच सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी, ताकि मरीजों की जांच में देरी न हो और इलाज तुरंत शुरू किया जा सके।
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क्या है खासियत : सेंटर की खासियत यह होगी कि इसमें दो सीटी स्कैन और एक एमआरआई मशीन भी प्रस्तावित है। न्यूरोसर्जरी और आर्थोपेडिक विशेषज्ञों की टीम चौबीसों घंटे मौजूद रहेगी, जिससे सड़क हादसों और गंभीर चोट के मामलों में तत्काल सर्जरी और उपचार हो सकेगा। इससे मरीजों को अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर करने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो जाएगी। अस्पताल के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर की डीपीआर तैयार है और स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
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उन्होंने कहा कि यह सेंटर गोल्डन ऑवर में उपचार सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा और इससे गंभीर मरीजों की जान बचाने की संभावना बढ़ेगी। वर्तमान में गंभीर मरीजों को इलाज के लिए दूर स्थित बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय नष्ट होता है। वहीं चोट लगे और एक्सीडेंटल मामलों के मरीजों को भी राहत मिलेगी। ट्रॉमा सेंटर शुरू होने के बाद यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी और पूर्वी दिल्ली के स्वास्थ्य ढांचे को नई मजबूती मिलेगी। ट्रॉमा सेंटर बनने से यमुनापार के लाखों लोगों को समय पर और बेहतर इलाज मिल सकेगा, जिससे आपातकालीन मामलों में मृत्यु दर में कमी आने की उम्मीद है।

तैयारी...

  • 250 बेड का अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर
  • करीब 75 आईसीयू बेड की व्यवस्था
  • 24 घंटे लैब, सीटी स्कैन, एक्स-रे सुविधा
  • न्यूरोसर्जरी व आर्थोपेडिक विशेषज्ञ हर समय तैनात
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