इनमें से किसी एक को लोकायुक्त बनाना चाहते हैं केजरीवाल
भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे अपने ही कैबिनेट मंत्री को पद से हटाने के बाद दिल्ली में लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर सरकार गंभीर हो गई है और इसके लिए आप सरकार की ओर से तीन नाम सुझाए गए हैं।
बता दें कि दिल्ली में नवंबर 2013 से लोकायुक्त का पद खाली पड़ा हुआ है। इस पर दिल्ली हाईकोर्ट सरकार को फटकार भी लगा चुकी है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान सरकार ने भरोसा दिलाया था कि अक्टूबर के अंत तक लोकायुक्त ही नियुक्त कर दी जाएगी।
इस मसले पर तत्परता दिखाते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लोकायुक्त के नाम पर फैसला करने के लिए उप-राज्यपाल को चिट्ठी लिख विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता और दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के साथ मीटिंग बुलाने की मांग की है।
असल में दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सरकार द्वारा सुझाए गए नाम को बदलने या किसी नए नाम की सिफारिश कर सकते हैं।
सरकार ने की इन तीन नामों की सिफारिश
सूत्रों की मानें तो दिल्ली सरकार ने लोकायुक्त पद के लिए तीन नामों की सिफारिश की है। इसमें उड़ीसा हाईकोर्ट के रिटायर्ड मुख्य न्यायाधीश बिलाल नजाकी, हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जसबीर सिंह और दिल्ली हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रेवा क्षेत्रपाल का नाम शामिल है।
गौर करने वाली बात है कि पूर्व न्यायाधीश रेवा क्षेत्रपाल का नाम पहले भी दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा जा चुका था जिसे कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया था।
हालांकि, इसके बाद ही यह पूरा मामला विवाद में आ गया क्योंकि दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करते हुए आरोप लगाया था कि इस मामले में उनसे सलाह नहीं ली गई।
अब जबकि सरकार इस महीने के अंत तक लोकायुक्त की नियुक्त प्रक्रिया को निबटाने की जल्दी में दिख रही है तो बीजेपी भी इसका श्रेय लेने की कोशिश कर रही है क्योंकि, उसका आरोप है कि भाजपा के दबाव के बाद ही सरकार लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर गंभीर हुई है।
कौन बन सकता है लोकायुक्त
बता दें कि पिछले महीने हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने 28 अक्टूबर तक लोकायुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने का आश्वासन दिया था।
1995 के दिल्ली लोकायुक्त और उपलोकायुक्त कानून की धारा तीन के मुताबिक राष्ट्रपति की पूर्व सहमति के बाद उप-राज्यपाल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और विपक्ष के नेता की सलाह पर लोकायुक्त की नियुक्ति कर सकते हैं।
हालांकि, लोकायुक्त नियुक्त होने वाले व्यक्ति के लिए किसी हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश या किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के तौर पर कम से कम सात साल का अनुभव होना जरूरी है।