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कल्याणकारी योजनाओं से राहत देने में पिछड़ी दिल्ली सरकार, सिर्फ 35 फीसदी पैसा ही हुआ खर्च

Mon, 12 Dec 2016 05:51 PM IST
अखिलेश कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली
अखिलेश कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 12 Dec 2016 05:51 PM IST
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delhi government unable to spend money of public welfare schemes on people, only 35 percent spend
- फोटो : अमर उजाला

दिल्ली सरकार गरीब, महिला एवं बाल विकास में लड़कियों की शिक्षा, दिव्यांगों के कल्याण और समाज के अन्य जरूरतमंद वर्ग के कल्याणकारी योजनाओं को सरकार गति देने में पिछड़ गई है।

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हालात यह है कि चालू वित्त वर्ष के शुरुआती सात महीनों में महज 35 फीसदी राशि ही इन योजनाओं पर सरकार खर्च कर पाई है। इतना ही नहीं बुजुर्गों के कल्याण के लिए बजट में 24 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था जिसमें सिर्फ 18 लाख रुपये ही सरकार खर्च कर पाई है।
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सूत्रों के अनुसार वित्त वर्ष 2016-17 के बजट में सरकार ने दिल्ली सरकार गरीब, महिला एवं बाल विकास में लड़कियों की शिक्षा, दिव्यांगों के कल्याण और समाज के अन्य जरूरतमंद वर्ग के कल्याणकारी योजनाओं के लिए 3722 करोड़ रुपये का बजट रखा था, लेकिन 1309 करोड़ रुपये ही खर्च हुए।

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शहरी विकास विभाग ने गरीबों पर खर्च के लिए 152 करोड़ रुपये का बजट रखा था जिसमें सिर्फ 33 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसमें झुग्गी झोपड़ी बस्ती में पर्यावरण विकास, कटरा पुनर्वास, बस्ती विकास केन्द्र पर खर्च की राशि यूं ही पड़ी है। स्वास्थ्य सेवा के लिए रखे गए 241 करोड़ रुपये में सिर्फ 71 करोड़, जलापूर्ति और साफ सफाई के लिए 37 करोड़ रुपये रखे गए थे जिसमें 9 करोड़ रुपये ही लगाए गए हैं।

 

महिला एवं बाल विकास की बात करें तो महिला कल्याण के लिए 441 करोड़ रुपये रखे गए, लेकिन 130 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं। मिड डे मील समेत सभी तरह के पोषण पर सरकार को 377 करोड़ रुपये खर्च करने थे जिसमें सिर्फ 93 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाए हैं।

पिछड़े और अल्पसंख्यकों का 93 फीसदी बजट नहीं हुआ खर्च

delhi government unable to spend money of public welfare schemes on people, only 35 percent spend
केजरीवाल

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों के कल्याण की योजनाएं आप सरकार में काफी पिछड़ रही हैं। सरकार ने बजट में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों के कल्याण विभाग का 373 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया था लेकिन अक्तूबर तक सिर्फ 27 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए हैं। इसके अलावा तकनीकी शिक्षा, शिक्षा और राजस्व विभाग का बजट भी इन वर्गों के लिए धरा रह गया है। इन वर्गों के कल्याण के लिए रखे गए पूरे बजट की बात करें तो 404 करोड़ रुपये में सिर्फ 28 करोड़ रुपये ही खर्च किए जा सके हैं। बाकी 93 फीसदी बजट अभी सरकार के खजाने में पड़ा है।

बसों के सीसीटीवी के 100 करोड़ यूं ही रखे हैं
दिल्ली सरकार ने डीटीसी और क्लस्टर बसों में सीसीटीवी लगाने के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया था। उसका इस्तेमाल नहीं हो सकता है तो बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ स्कीम में रखे गए साढ़े चार करोड़ रुपये की राशि भी खजाने की शोभा बढ़ा रही है। इसके अलावा पुरानी सरकार में शीला दीक्षित की सबसे महत्वाकांक्षी लाडली योजना में रखी गए 110 करोड़ रुपये के बजट में सरकार अक्तूबर तक सिर्फ 14 करोड़ रुपये ही खर्च कर सकी है।

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