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बेहतर परिवहन व्यवस्था देने में फिसड्डी रही दिल्ली सरकार, दावे हो रहे फेल 

Wed, 13 Jul 2016 01:15 AM IST
बृजेश सिंह /अमर उजाला, नई दिल्ली
बृजेश सिंह /अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 13 Jul 2016 01:15 AM IST
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Delhi government to provide better transport system laggards, are claims fell
केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
प्रदूषण मुक्त दिल्ली, सड़क पर सुरक्षित सफर और बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की बात करने वाली सरकार इसमें पिछड़ती जा रही है। मौजूदा वित्त वर्ष में परिवहन विभाग को मिले बजट में अगर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के लिए मिले बजट और खर्च की बात करें तो सरकार इससे जुड़ी किसी भी योजना पर पहले दो महीने में एक फीसदी रकम भी खर्च नहीं कर पाई है। 
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फिर चाहे सड़क पर रोड सेफ्टी की बात हो, बस में सीसीटीवी कैमरा लगाना हो या फिर नई बस खरीदना हो। मौजूदा वित्त वर्ष 2016-17 के मुताबिक दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग का कुल बजट 1735 करोड़ का है।
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पहले दो महीने अप्रैल व मई में इसमें से 629 करोड़ रुपये खर्च हो चुका है। मगर यह खर्च परिवहन विभाग की अलग-अलग प्राधिकरणों में हिस्सेदारी के तहत दिए जाने वाले बजट के अलावा विभाग के कार्यालयों का खर्च, अधिकारियों व कर्मचारियों का वेतन है।  इसमें बस खरीदने, रोड सेफ्टी, सुरक्षा को लेकर एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया है। 
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दो माह में खर्च नहीं हुआ एक भी रुपया

Delhi government to provide better transport system laggards, are claims fell
अरविंद केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला
दो माह में एक भी रुपया खर्च नहीं :
अगर बात बेहतर परिवहन व्यवस्था, प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए शुरू हुई नई योजना व सुरक्षा की बात करें तो इसमें कई मदों में दो माह के दौरान एक रुपया भी खर्च नहीं किया गया है। 

रोड सेफ्टी के मद में परिवहन विभाग को 85 करोड़ का बजट मिला है पर बीते अप्रैल व मई में महज 2.14 लाख रुपये खर्च हुए हैं। जागरूकता के लिए आयोजित होने वाले कार फ्री-डे के लिए एक करोड़ रुपये तय है पर उसमें एक भी रुपया खर्च नहीं हुआ, क्योंकि बीते तीन माह से एक भी कार फ्री-डे नहीं मनाया गया है, जबकि इसका मकसद लोगों को कार छोड़कर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से जोड़ना है। 

सार्वजनिक परिवहन में पिछड़ी सरकार :
दिल्ली सरकार फिर से बसें खरीदने में फेल साबित हुई है। वह भी तब जबकि दूसरे सम विषम खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही थी। 

सम विषम को अस्थाई उपाय बताया गया था, सरकार जुलाई तक कम से कम एक हजार बसें सड़क पर उतारने का दावा कर रही थी लेकिन अभी तक वह इसमें नाकाम रही है। सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए इलेक्ट्रॉनिक बसें व कनेक्टिविटी के लिए फीडर बसें लाने में भी नाकाम रही है। 
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