{"_id":"5d5866968ebc3e89be0cf8b2","slug":"delhi-government-support-to-manjha-mafias-said-vijendra-gupta","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली सरकार दे रही है मांझा माफियाओं को श्रेय, विजेंद्र गुप्ता ने उपराज्यपाल से की जांच की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली सरकार दे रही है मांझा माफियाओं को श्रेय, विजेंद्र गुप्ता ने उपराज्यपाल से की जांच की मांग
Sun, 18 Aug 2019 02:11 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Sun, 18 Aug 2019 02:11 AM IST
विज्ञापन
चायनीज मांझा
- फोटो : Vishnu Sharma
चीनी मांझा एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ है। पाबंदी के बावजूद यह मांझा चोरी-छिपे दुकानदारों ने अपने पुराने स्टॉक की बिक्री की है। पंद्रह अगस्त को इस मांझे की बिक्री ज्यादा की गई। अब इस मांझे पर राजनीति भी शुरू हो गई है।
विज्ञापन
विधानसभा नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली सरकार पर मांझा माफियों को श्रय देने का आरोप लगाया है। दोषियों को सजा दिलवाने के लिए उप राज्यपाल से तत्काल उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। गुप्ता ने कहा है कि चीनी मांझे के जानलेवा होने के बावजूद सरकार इसकी बिक्री पर लगाम लगाने में विफल साबित हुई है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बताए कि दिल्ली में प्रतिबंध के बावजूद चीनी मांझा कैसे बिक रहा है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ेंः राखी के दिन ही इकलौते भाई की मौत, मांझे से गला कटने पर दोनों बहनों की बाहों में तोड़ा दम
विज्ञापन
पुराने स्टॉक की बिक्री
पिछले साल ही चीनी मांझे पर बैन लगा था। कई दुकानदारों के पास स्टॉक बचा हुआ था। पंद्रह अगस्त के दिन चोरी छिपे इस मांझे की बिक्री की गई। फेडरेशन ऑफ ट्रेड एसोसिएशन ऑफ दिल्ली के अध्यक्ष अजय अरोड़ा का कहना है कि बाजार में चीन का मांझा इस वर्ष नहीं आया। ऐसा प्रतीत होता है कि दुकानदारों ने पुराने स्टॉक निकालकर यह मांझा बेचा। उनके पास पहले से ही माल पड़ा हुआ था। इस स्टॉक पर अगर छापामारी की गई होती तो किसी की जान नहीं जाती। व्यापारियों को जान-माल का नुकसान करने वाले चीजों को बेचने से दूरी बनाने की आवश्यकता है।
पूर्वी, पश्चिमी व बाहरी दिल्ली में सबसे अधिक बिका यह मांझा
दिल्ली के व्यापारियों की माने तो पिछले साल की तरह ही इस साल भी बाहरी व पूर्वी दिल्ली में सबसे अधिक मांझा बिका। थोक विक्रेताओं से छोटे दुकानदार पहले ही इस मांझे को खरीद लिए थे। पंद्रह अगस्त को मौका मिलते ही इस मांझे की बिक्री छोटे दुकानदारों ने की।