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दिल्ली सरकार प्राइवेट स्कूलों पर सख्त, विधानसभा में विधेयक पेश

Sat, 21 Nov 2015 01:02 PM IST
Updated Sat, 21 Nov 2015 01:02 PM IST
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Delhi government strict on private schools

दिल्ली सरकार और उसकी तरफ से गठित समिति निजी स्कूलों के कान खींच सकेंगी। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने विपक्ष के हंगामे और वॉकआउट के बीच शुक्रवार को निजी स्कूलों के बही खातों की जांच से लेकर नर्सरी दाखिले पर कानूनी पहरा बैठाने के लिए एक संशोधन विधेयक और एक नया विधेयक पेश किया है।

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दोनों विधेयक चर्चा के बाद पास किए जाएंगे, जिन्हें अंतिम स्वीकृति के लिए उपराज्यपाल के माध्यम से केन्द्र सरकार को भेजना होगा। सरकार ने दिल्ली विद्यालय शिक्षा (संशोधन) विधेयक, 2015 में पहली कक्षा की जगह एंट्री लेवल (प्री-प्राइमरी या प्री-स्कूल) कर दिया गया है।
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मसलन जहां 6 साल से कम आयु के बच्चे का दाखिला होता है, वहां उसी स्तर से दिल्ली विद्यालय शिक्षा अधिनियम, 1973 की धारा 2 में कर दिया गया है। अधिनियम में एंट्री लेवल पर इंटरव्यू व डोनेशन के लिए पांच से दस लाख रुपये तक जुर्माना व तीन साल तक सजा का प्रावधान है।

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जांच के लिए बनेग समिति

Delhi government strict on private schools

हालांकि एंट्री लेवल से आगे की कक्षा में प्रवेश के लिए स्क्रीनिंग की छूट है। इस कानून में अपराध को गैर-संज्ञेय और जमानती रखा गया है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली विद्यालय (लेखों की जांच और अधिक फीस वापसी) विधेयक, 2015 भी पेश किया।


इसमें सरकार निजी स्कूलों के लेखों एवं फीस की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त जज या प्रधान सचिव स्तर के रिटायर अधिकारी की अध्यक्षता में समिति बनाएगी। वो समिति को न्यायिक कार्रवाई माना जाएगा। समिति को एक सिविल न्यायालय माना जाएगा।

अलग-अलग तरह के उल्लंघन पाए जाने पर पचास हजार रुपये से पांच लाख रुपये तक अर्थदंड और अधिकतम तीन साल तक सजा का प्रावधान होगा।

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