दो आईपीएस अधिकारियों की लड़ाई पहुंची कोर्ट के दरवाजे
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दिल्ली में एंटी करप्शन ब्यूरो का मामला अब दो अधिकारियों या सरकार व राज्यपाल के बीच से निकल कर अदालत के दरवाजे तक पहुंच गया है।
शुक्रवार को दिल्ली के एंटी करप्शन ब्यूरो के कार्यालय में एमके मीणा और एसएस यादव के बीच हुए ड्रामे के सार्वजनिक होने के बाद आखिर इस मामले को कोर्ट में चुनौती दी गई है।
दिल्ली सरकार ने एमके मीणा को एंटी करप्शन ब्यूरो का प्रमुख नियुक्त किए जाने को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। सरकार ने मीणा के खिलाफ हाईकोर्ट में अंतरिम एप्लीकेशन दायर कर उन्हें हटाने की मांग की है।
बता दें कि दिल्ली सरकार ने एसएस यादव को इसका प्रमुख नियुक्त किया था। इसके बाद उपराज्यपाल ने इसमें हस्तक्षेप करते हुए संयुक्त सचिव एमके मीणा को एंटी करप्शन ब्यूरो का प्रमुख नियुक्त कर दिया।
इसके बाद से ही एंटी करप्शन ब्यूरो दो अधिकारियों की खीचंतान का शिकार बना हुआ है। शुक्रवार को एसीबी कार्यालय में एसएस यादव के साथ कुछ अधिकारियों की झड़प के बाद उन्होंने चौथी मंजिल से कूद कर आत्महत्या करने की धमकी दी थी।
इन आधार पर होगी कोर्ट में जिरह
केंद्र सरकार व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच तनातनी का ही नतीजा है कि एसीबी में अब दो प्रमुख हैं। सूत्रों के अनुसार, याचिका में सरकार मीणा को पक्षकार बनाने की मांग करेगी।
यह भी मांग की जाएगी कि अदालत में याचिका के फैसला आने तक मीणा के एसीबी प्रमुख के तौर पर काम करने पर रोक लगाई जाए।
याचिका में यह भी तर्क रखेंगे कि मीणा एफआईआर बुक को एसीबी मुख्यालय से बाहर ले जाना चाहते थे, जिसकी अनुमति नहीं है।
एसीबी केवल सतर्कता निदेशालय को रिपोर्ट करती है। केंद्र सरकार ने गत 21 मई व 23 जुलाई 2014 को जारी अपनी अधिसूचना में दिल्ली पुलिस समेत सरकारी कर्मचारियों पर एसीबी द्वारा कार्रवाई करने के अधिकार सीमित कर दिए थे।