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महिला सुरक्षा के दावे जरूर, रेप को लेकर केंद्र व दिल्ली सरकार गंभीर नहीं

Mon, 09 Jul 2018 08:47 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो,अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 09 Jul 2018 08:47 PM IST
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Delhi goverment and centrail govt not sireouse for woman security
women security

वसंत विहार गैंगरेप को बीते साढ़े पांच वर्ष हो गए। रेप की घटनाओं को रोकने के लिए कमेटी बनी, कड़े दंड का प्रावधान किया गया, हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लेकर महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सुनवाई की। बावजूद इसके केंद्र व राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए और वर्तमान में भी प्रतिदिन दिल्ली में रेप की पांच घटनाएं हो रही हैं।

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वसंत विहार गैंगरेप की घटना के बाद हाईकोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेकर महिला सुरक्षा को लेकर सुनवाई शुरू की। अदालत ने आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे को  सीएसएफएल लैब की बढ़ोतरी, पुलिसकर्मियों की संख्या में भर्ती, सीसीटीवी कैमरे इत्यादि लगाने का निर्देश दिया। साढ़े चार वर्ष बीत गए, बार-बार अदालत की फटकार खाने के बावजूद केंद्र व दिल्ली सरकार ने इनमें से एक पर भी ईमानदारी से काम शुरू नहीं किया।
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राजधानी में दिन प्रतिदिन रेप, गैंगरेप (विशेषकर बच्चियों से) की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। राजनीतिक पार्टियां घटना होने पर एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप की बौछार कर देती है और  प्रदर्शन कर अपनी भड़ास भी निकाल लेती है, लेकिन इन घटनाओं को जड़ से रोकने की दिशा में कोई प्रयासरत नहीं हैं। वसंत विहार गैंगरेप मामला इसका जीता जागता उदाहरण है।

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महिला सुरक्षा के लिए न तो पैसा न ही समय
वंसत विहार गैंगरेप के बाद हाईकोर्ट ने संज्ञान लेकर दिल्ली पुलिस में करीब 50 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती पर जोर दिया। अदालत का मानना है कि कानून-व्यवस्था और जांच प्रक्रिया अलग-अलग होनी चाहिए। केंद्र ने भी फिलहाल 14 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती पर हामी भर दी, लेकिन अभी तक एक भी भर्ती नहीं हुई, फाइल गृह मंत्रालय से पास हुई तो वित्त मंत्रालय में अटक गई।

हजारों करोड़ के घपले सामने आ रहे हैं बावजूद इसके केंद्र सरकार ने अब 14 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती के बाद प्रति वर्ष 483 करोड़ रुपये की राशि वहन करने से इनकार कर दिया। केंद्र ने कहा कि इतनी अधिक राशि उसके पास नहीं है। यानि महिला सुरक्षा को रुपयों से तौला जा रहा है। अब सरकार ने  3792 पुलिसकर्मियों की हामी भरी है लेकिन अब तक  एक  भी भर्ती नहीं हुई।

एफएसएल लैब, सीसीटीवी कैमरे नहीं
हाईकोर्ट ने इसी प्रकार एफएसएल लैब की संख्या में बढ़ोतरी करने के लिए कहा। दिल्ली सरकार साढ़े पांच वर्ष में अभी तक पूरी तरह से लैब की संख्या भी नहीं बढ़ा पाई। हर बार जमीन व पैसों के मुद्दे पर बात अटक जाती है। वहीं सीसीटीवी कैमरों की बात करे तो अभी तक एक भी कैमरा नहीं लगा। अदालत में हर बार दिल्ली पुलिस व आप सरकार एक दूसरे पर आरोप जरूर लगा देती है। आखिर कैमरे कब लगेंगे और कब आम लोगों की सुरक्षा होगी अभी तय नहीं। 
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