'पापा सोचते हैं, मैं इतिहास पढ़ रही हूं, जबकि मैं इतिहास बना रही हूं'
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नागरिकता कानून के विरोध में देश के तमाम हिस्सों में प्रदर्शन चल रहे हैं। गुरुवार को दिल्ली के कई इलाकों में लोगों ने इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के कई इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों ने सड़क पर उतरकर भी विरोध जताया।
अच्छी बात यह रही कि इस विरोध प्रदर्शन के दौरान राजधानी में किसी तरह की हिंसा नहीं हुई। एहतियातन 21 मेट्रो स्टेशनों को साढ़े तीन घंटे के लिए बंद कर दिया गया था। लाल किले के पास से सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया।
इसी बीच प्रदर्शन के दौरान एस ऐसा नजारा देखने को मिला जिससे देश में मचे इस उथल-पुथल के बीच एक बार फिर अमन-शांति की उम्मीद जाग गई। यह तस्वीर मंडी हाउस के पास की है। इसमें नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने आई एक युवती पुलिसकर्मी को शांति के प्रतीक के रूप में गुलाब का फूल देती हुई नजर आ रही है।
पिछले दिनों राजधानी में हुई हिंसक घटनाएं, विरोध प्रदर्शन, आगजनी और तहस-नहस के बीच एक ऐसी तस्वीर दिल को ठंडक पहुंचाती है। इसमें पुलिसकर्मी को फूल देने वाली युवती के हाथ में एक तख्ती है, उसपर लिखा हुआ है कि, "मेरे पापा सोचते हैं मैं इतिहास पढ़ रही हूं, जबकि असल में मैं इतिहास रच रही हूं।"
बता दें कि आज दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान एक और राहत भरी खबर सामने आई जब राजीव गांधी स्टेडियम और सूरजमल स्टेडियम के पास से जिन लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था उनके लिए प्रशासन की तरफ से ही खाने-पीने की भी व्यवस्था की गई थी। ऐसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन से दिल्ली के लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर थोड़ी सकारात्मकता आई है।