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Delhi Assembly Elections : किसी ने चखा जीत का स्वाद... तो किसी को मिली हार, दिलचस्प रहा है वोटों का गणित
Wed, 29 Jan 2025 07:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा
नितिन राजपूत, नई दिल्ली
नितिन राजपूत, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 29 Jan 2025 07:22 AM IST
सार
इनमें हार-जीत भले ही किसी की भी रही हो, लेकिन वोटों का गणित हमेशा दिलचस्प रहा।
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दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
विधानसभा चुनाव के सियासी जंग में किसी पार्टी ने जीत का स्वाद चखा है तो किसी को हार मिली है। इनमें हार-जीत भले ही किसी की भी रही हो, लेकिन वोटों का गणित हमेशा दिलचस्प रहा।
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15 साल तक सत्ता संभालने वाली शीला दीक्षित सरकार हो या 2015 में सुनामी वोट पाने वाली केजरीवाल सरकार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मत प्रतिशत पर कोई फर्क नहीं पड़ा। 1998 से लेकर 2020 तक छह बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा का मत प्रतिशत 32 से 38 के बीच था, जबकि कांग्रेस का ग्राफ गिरा और आप का ऊपर गया। इसमें सबसे खास बात यह रही कि राजधानी में चार बार महज चार से 13 फीसदी के मत प्रतिशत के अंतर से सरकारें भी बन गईं।
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इस बार की चुनावी गहमागहमी में सियासी पार्टियां इतने ही फीसदी के बीच पूरे चुनाव के आकलन में जुटी हैं। भाजपा अपने पारंपरिक वोट से आगे बढ़ना चाहती है तो आप
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अपने ग्राफ को बरकरार रखने की तैयारी में जुटी है। इनके बीच सबसे कम फीसदी वोट पाने वाली कांग्रेस वापस मुख्यधारा में लौटना चाहती है।
वहीं, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और लोकसभा चुनाव में भले ही भाजपा ने कई बार जीत के परचम लहराए हों, लेकिन विधानसभा चुनाव में पार्टी को अब तक सिर्फ एक बार ही 40 फीसदी से ज्यादा वोट मिले हैं। वर्ष 1993 में मदनलाल खुराना की सरकार में भाजपा को 42.82 फीसदी वोट मिले थे। इसके बाद भाजपा का वोट बैंक इसके आस-पास भी नहीं रहा।
आप की सुनामी में बही कांग्रेस-भाजपा
1993 से 2008 तक के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर देखने को मिलती थी, लेकिन 2013 में आम आदमी पार्टी (आप) की एंट्री ने दोनों पार्टी को झटका दिया है। कांग्रेस को 15.7 तो भाजपा को 3.4 फीसदी वोट का नुकसान उठाना पड़ा, जबकि पहली बार चुनाव लड़ने वाली आप को 29.5 फीसदी वोट मिले थे। 2015 के चुनाव में आप को 24.86 फीसदी वोट का और फायदा हुआ और उसका मत प्रतिशत 54.30 फीसदी पर पहुंच गया था।
भाजपा का वोट बैंक रहा स्थिर
1993 के चुनाव को छोड़ दें, तो 1998 से 2015 तक विस चुनाव में भाजपा का वोट बैंक लगभग स्थिर रहा। 22 सालों में दिल्ली भाजपा का वोट बैंक 32 से 38 फीसदी के बीच ही रहा। 1998 में पार्टी को 34.02 फीसदी वोट मिले। 2003 में 35.22, 2008 में 36.34, 2013 में 33 और 2015 में 32.3 और 2020 के चुनाव में 38.51 फीसदी वोट मिले थे।