दिल्ली चुनाव में 'जाट' एंट्री!: केजरीवाल के आरोप पर प्रवेश वर्मा का पलटवार, बोले- आज याद आई; बिधूड़ी ने भी घेरा
Delhi Assembly Election 2025: अरविंद केजरीवाल के आरोप पर प्रवेश वर्मा ने पलटवार किया है। प्रवेश वर्मा ने कहा कि उन्हें देशद्रोही कहकर देशभक्त जाटों का अपमान किया है। नई दिल्ली की सीट खिसकती देख तो जाट आरक्षण पर अरविंद केजरीवाल सियासत कर रहे हैं।
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पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आरोप पर भाजपा के पूर्व सांसद व जाट नेता प्रवेश वर्मा ने पलटवार किया है। कहा है कि केजरीवाल की राजनीतिक जमीन खिसक गई है। पिछले 11 साल में उन्हें यह बिरादरी नहीं दिखीं, चुनाव आते ही उन्हें अब जाट याद आ रहे हैं। दिल्ली-देहात के लोगों को अपना ''शीश महल'' तक दिखाने में ऐतराज करने वाले केजरीवाल ने मुख्यमंत्री रहते हुए कभी गांव का दौरा नहीं किया। दिल्ली देहात के लिए एक भी काम नहीं किया। दिल्ली के जाट नेता पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा की समाधि बनाने के लिए पत्र तक का जवाब नहीं दिया।
प्रवेश वर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बाहरी दिल्ली में आने वाली 28 विधानसभा क्षेत्रों में ''आप'' हार रही है। यहां के लोगों ने बैठक कर उन्हें वोट नहीं देने का निर्णय लिया है। दिल्ली देहात में जाट के साथ ही गुर्जर, यादव, राजपूत, त्यागी सहित 36 बिरादरी के लोग उनके विरुद्ध मतदान करेंगे। केजरीवाल ने देश के सैनिकों की बहादुरी दिखाने वाले जाट समुदाय के लोगों का विरोध किया है। जाट ही नहीं अन्य सभी जातियों का भी अपमान किया। काले झंडे दिखाने के लिए दिल्ली देहात के लोग तैयार है।
प्रवेश वर्मा ने कहा कि दिल्ली में पहली बार जाट मुख्यमंत्री डॉ. साहिब सिंह को भाजपा ने ही बनाया था। देशद्रोही कहकर देशभक्त जाटों का अपमान केजरीवाल ने किया है। उनके सियासी चाल को जाट समाज बखूबी समझ रहा है। इस बार वे जाट बिरादरी के हत्थे चढ़ गए है, उन्हें नई दिल्ली सीट छोड़कर भागनी पड़ेगी। जमानत जब्त कराने के लिए सभी तैयार है। केजरीवाल को तो जाटों से बदबू आती है।
केजरीवाल का जाट-प्रेम केवल घड़ियाली आंसू हैं: बिधूड़ी
भाजपा सांसद व गुजर नेता रामवीर सिंह बिधूड़ी ने अरविंद केजरीवाल के एकाएक उमड़े ‘जाट-प्रेम’को चुनावी सागर में घड़ियाली आंसू करार दिया है। कहा कि केजरीवाल को यह शायद मालूम नहीं है कि दिल्ली में जाटों को आरक्षण 1993 में बनी भाजपा सरकार ने ही दिया था। दिल्ली देहात की लगातार उपेक्षा के कारण गांवों में जाटों समेत सभी जातियों के लोग उनसे दूरी बना लिए है।
'दिल्ली में जाटों को आरक्षण भाजपा सरकार ने ही दिया था'
बिधूड़ी ने कहा कि 1993 में जब दिल्ली में भाजपा सरकार बनी थी तो वे खुद भी जाट समाज के आग्रह पर विधायक के रूप में सरकार से अनुरोध किए की जाटों को ओबीसी में शामिल किया जाना चाहिए और इसके बाद भाजपा सरकार ने यह फैसला लिया था। उन्होंने कहा कि केजरीवाल बताएं कि आखिर पिछले दस सालों में कितने जाट युवकों को सरकारी नौकरी उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई। दिल्ली में जाटों के करीब 200 गांव हैं, जहां अधिकतर लोग खेती पर ही निर्भर हैं लेकिन दिल्ली के किसानों के साथ केजरीवाल ने जो सौतेला व्यवहार किया है, वह किसी से छिपा नहीं है।
इन गांवों के किसान ही केजरीवाल से यह पूछना चाहते हैं कि उन्होंने केंद्र में मोदी की सरकार के किसान कल्याणकारी योजनाओं को दिल्ली में लागू क्यों नहीं होने दिया? उन्होंने किसानों को सस्ती दरों पर खेती के लिए बिजली उपलब्ध क्यों नहीं कराई जबकि हरियाणा के किसानों को यह सुविधा मिलती है? दिल्ली के किसानों से बिजली के कॉमर्शियल रेट वसूल किए जाते हैं। ट्रैक्टर को कॉमर्शियल वाहन घोषित क्यों किया?दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा दिल्ली में किसानों के सर्वप्रिय नेता रहे हैं और केजरीवाल से बार-बार अनुरोध किया गया कि किसी संस्थान का नाम उनके नाम पर करें लेकिन उन्होंने ऐसा करना उचित नहीं समझा।