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Delhi : कथनी और करनी में अंतर कहीं अनुवांशिक रोग तो नहीं, दुनियाभर में शोध कराएगा आरएमएल अस्पताल
Sun, 17 Mar 2024 01:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 17 Mar 2024 01:59 AM IST
सार
इसके कारणों को जानने के लिए मनोरोग विशेषज्ञ दुनियाभर में शोध करेंगे। शोध की शुरुआत डॉ. राम मनोहर लोहिया से होगी।
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RML Hospital
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
बड़ी-बड़ी बातें सोचना, कुछ बड़ा करने का सपना देखना और फिर कुछ न करना। इसके लिए खुद को दोषी मानकर तनाव में चले जाना अनुवांशिक रोग हो सकता है। इसके कारणों को जानने के लिए मनोरोग विशेषज्ञ दुनियाभर में शोध करेंगे। शोध की शुरुआत डॉ. राम मनोहर लोहिया से होगी।
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मनोरोग विशेषज्ञ की मानें तो ऐसी स्थिति को बाइपोलर डिसऑर्डर मानते हैं। इसमें मरीज खुद पर जरूरत से ज्यादा विश्वास करने लगता है। कई बार ऐसी बातें करने का प्रयास करता है जो उसकी क्षमता से बाहर होती है और उसके पूरा न होने पर तनाव में चला जाता है। बाइपोलर डिसऑर्डर वाले कुछ लोगों के मिजाज में उतार-चढ़ाव तेजी से होता है। वह कुछ समय के बाद पूरी तरह से ठीक भी हो जाते हैं। मरीज इसमें सामान्य दिखता है लेकिन वह अवसादग्रस्त होता है।
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डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मनोरोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. लोकेश शेखावत ने कहा कि बाइपोलर डिसऑर्डर अनुवांशिक रोग हो सकता है। इसकी जानकारी हासिल करने के लिए दुनियाभर में शोध किया जाएगा। इस शोध का नेतृत्व डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल करेगा। इस शोध में 20 हजार मरीजों को शामिल किया जाएगा। इनमें 10 हजार मरीज भारत से होंगे, जबकि अन्य 10 हजार मरीज ताइवान, सिंगापुर, पाकिस्तान सहित अन्य देशों से होंगे। शोध में एम्स सहित अन्य बड़े संस्थानों के मनोरोग विभाग के विशेषज्ञ साथ आए हैं। इस अध्ययन के बाद रोग के बारे में सटीक जानकारी मिल पाएगी। वैज्ञानिक आधार मिलने के बाद पता चल पाएगा कि इस रोग का कारण क्या है। रोग के इलाज के लिए विधि तैयार की जा सकेगी।
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डॉ. केनेथ का मिलेगा सहयोग
इस शोध को पूरा करने में मनोचिकित्सक डॉ. केनेथ एस केंडलर का सहयोग मिलेगा। वह वर्जीनिया कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी, यूएसए के प्रोफेसर हैं। उन्होंने मनोदशा संबंधी विकारों पर शोध किया है। डॉ. केंडलर ने 1200 से अधिक प्रकाशन व 18 पुस्तकों से मनोरोग में बदलाव लाया है।