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Delhi : दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- सशस्त्र बल वर्दी से एकजुट हैं धर्म से नहीं, ईसाई सैन्य अधिकारी की अर्जी खारिज

Mon, 02 Jun 2025 04:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 02 Jun 2025 04:19 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि सशस्त्र बल अपनी वर्दी से एकजुट हैं, धर्म से नहीं। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की पीठ ने 30 मई को सेना के लेफ्टिनेंट सैमुअल कमलेसन की याचिका को खारिज कर दिया।

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Delhi: Delhi High Court said- Armed forces are united by uniform and not by religion
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने साप्ताहिक रेजिमेंटल धार्मिक परेड में हिस्सा लेने से लगातार इन्कार करने पर एक ईसाई सैन्य अधिकारी की सेवा समाप्ति के फैसले को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने कहा कि सशस्त्र बल अपनी वर्दी से एकजुट हैं, धर्म से नहीं। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की पीठ ने 30 मई को सेना के लेफ्टिनेंट सैमुअल कमलेसन की याचिका को खारिज कर दिया।

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लेफ्टिनेंट ने एक स्क्वाड्रन के ट्रूप लीडर के रूप में काम किया था। उन्हें पेंशन और ग्रेच्युटी दिए बिना ही सेना से बर्खास्त कर दिया गया था। उन्होंने 3 मार्च, 2021 को सेवा समाप्ति आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और सेवा में फिर से रखने की अपील की थी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने अपने धर्म को अपने वरिष्ठ के वैध आदेश से ऊपर रखा तथा आदेश की अवज्ञा करना सेना अधिनियम के तहत अपराध है।
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पीठ ने कहा कि मौजूदा मामले में सवाल धार्मिक स्वतंत्रता का नहीं है। यह वरिष्ठ के वैध आदेश का पालन करने का प्रश्न है। याचिकाकर्ता ने अपने वरिष्ठ अधिकारी के वैध आदेश से ऊपर अपने धर्म को रखा। यह स्पष्ट रूप से अनुशासनहीनता का कार्य है। पीठ ने कहा कि हमारे सशस्त्र बलों में सभी धर्मों, जातियों, पंथों, क्षेत्रों और आस्थाओं के कर्मी शामिल हैं। इनका एकमात्र उद्देश्य देश को बाहरी आक्रमणों से बचाना है। वे अपने धर्म, जाति या क्षेत्र से विभाजित होने के बावजूद अपनी वर्दी से एकजुट हैं। 
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याचिकाकर्ता ने कहा रेजिमेंट में चर्च नहीं, इसलिए छूट मांगी
याचिकाकर्ता ने याचिका में दलील दी थी कि उनकी रेजिमेंट में केवल एक मंदिर और एक गुरुद्वारा है। वहां सभी धर्मों के लोगों के लिए कोई सर्व धर्म स्थल नहीं है। चर्च भी नहीं है। एकेश्वरवादी ईसाई धर्म को मानने के कारण उन्होंने साप्ताहिक धार्मिक परेड और अन्य कार्यक्रमों के लिए मंदिर व गुरुद्वारा जाने से छूट मांगी थी। 

  • रेजिमेंट धर्म से जुड़े हो सकते हैं, पर धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर असर नहीं : पीठ ने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी दिन रात सीमाओं की रक्षा करने वालों के समर्पण को सलाम किया और कहा कि एकरूपता और सभी धर्मों के प्रति सम्मान सशस्त्र बलों के सुसंगठित, अनुशासित तथा समन्वित कामकाज के लिए आवश्यक है
  • सशस्त्र बलों का चरित्र धर्म से पहले देश को रखता है। पीठ ने कहा कि सेना में रेजिमेंट के नाम ऐतिहासिक रूप से धर्म या क्षेत्र से जुड़े हो सकते हैं लेकिन इससे सेना के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर कोई असर नहीं पड़ता है
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