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दर्दनाक: गरीब मजदूरों के परिजनों के पास शव गांव ले जाने के भी पैसे नहीं, इमारत तोड़ते समय हादसे में तीन की मौत
Thu, 21 Aug 2025 01:47 PM IST
शाहरुख खान
शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली
शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 21 Aug 2025 01:47 PM IST
सार
दिल्ली के दरियागंज इलाके में बुधवार दोपहर जर्जर इमारत का पिछला हिस्सा गिरने के बाद वहां काम करने वाले मजदूरों ने इमारत के मालिक व ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इनका कहना है कि बिना सुरक्षा उपकरण दिए ही उनसे इमारत तोड़ने का काम करवाया जा रहा था।
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Delhi Daryaganj Tragedy
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली के दरियागंज हादसे में मौत के मुंह में समा गए जुबैर, तौफीक और गुल सागर के परिजनों के पास इतने भी पैसे नहीं हैं कि वह पोस्टमार्टम के बाद शवों को बिहार अपने गांव ले जा सकें। मजदूरी करके उनको 600 या 700 रुपये मिलते थे। हादसा हुआ तो ठेकेदार व मालिक मौके से भाग निकले। मजदूरों के पास खाने के भी पैसे नहीं थे।
रोते हुए परिजनों ने ठेकेदार और मालिक से आर्थिक मदद की गुहार लगाई। इसके अलावा परिजन पुलिस व प्रशासन से गुहार लगा रहे थे कि वह शवों को गांव ले जाने का इंतजाम करा दें। हादसे की सूचना मिलने के बाद बुधवार दोपहर दिल्ली में रहने वाले मजदूरों के परिजन एलएनजेपी अस्पताल पहुंच गए।
एक परिजन ने बताया कि जुबैर कुछ दिनों पहले ही चाचा तौफीक के पास दिल्ली आया था। तौफीक की मौसी महरुन खातून ने रोते हुए बताया कि एक महीने पहले जुबैर बिहार से दिल्ली घूमने आया था। कुछ दिन वह आनंद विहार उनके घर पर रुका।
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करीब 10 दिन पहले वह अपने चाचा तौफीक के साथ चिड़ियाघर घूमने गया था। एक अन्य मजदूर इमरान ने बताया कि तीनों ही मजदूर आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से दिल्ली में काम के लिए आए थे।
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रोते हुए परिजनों ने ठेकेदार और मालिक से आर्थिक मदद की गुहार लगाई। इसके अलावा परिजन पुलिस व प्रशासन से गुहार लगा रहे थे कि वह शवों को गांव ले जाने का इंतजाम करा दें। हादसे की सूचना मिलने के बाद बुधवार दोपहर दिल्ली में रहने वाले मजदूरों के परिजन एलएनजेपी अस्पताल पहुंच गए।
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एक परिजन ने बताया कि जुबैर कुछ दिनों पहले ही चाचा तौफीक के पास दिल्ली आया था। तौफीक की मौसी महरुन खातून ने रोते हुए बताया कि एक महीने पहले जुबैर बिहार से दिल्ली घूमने आया था। कुछ दिन वह आनंद विहार उनके घर पर रुका।
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करीब 10 दिन पहले वह अपने चाचा तौफीक के साथ चिड़ियाघर घूमने गया था। एक अन्य मजदूर इमरान ने बताया कि तीनों ही मजदूर आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से दिल्ली में काम के लिए आए थे।
दिल्ली में मजदूरी करने आया था तौफीक
सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक सभी यहां पर काम करते थे। तौफीक के परिवार में पत्नी निशा बेगम के अलावा दो बेटे व दो बेटियां हैं। वह बच्चों को पढ़ाने लिखाने के लिए दिल्ली में काम करने आया था।
सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक सभी यहां पर काम करते थे। तौफीक के परिवार में पत्नी निशा बेगम के अलावा दो बेटे व दो बेटियां हैं। वह बच्चों को पढ़ाने लिखाने के लिए दिल्ली में काम करने आया था।
परिवार में अकेला कमाने वाला था तौफीक
परिवार में तौफीक ही अकेला कमाने वाला था। गांव में इनकी मौत की सूचना मिलने पर परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। कुछ परिजन इनकी मौत की सूचना मिलने पर बिहार से दिल्ली के लिए रवाना भी हो गए हैं।
परिवार में तौफीक ही अकेला कमाने वाला था। गांव में इनकी मौत की सूचना मिलने पर परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। कुछ परिजन इनकी मौत की सूचना मिलने पर बिहार से दिल्ली के लिए रवाना भी हो गए हैं।
बिना सुरक्षा उपकरणों के मजदूरों से तुड़वाई जा रही थी इमारत
दिल्ली के दरियागंज इलाके में बुधवार दोपहर जर्जर इमारत का पिछला हिस्सा गिरने के बाद वहां काम करने वाले मजदूरों ने इमारत के मालिक व ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इनका कहना है कि बिना सुरक्षा उपकरण दिए ही उनसे इमारत तोड़ने का काम करवाया जा रहा था।
कई बार ठेकेदार व मालिक से सुरक्षा उपकरणों की डिमांड की थी लेकिन उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया गया। ऐसे में उनकी लापरवाही के कारण हादसा हो गया।
दिल्ली के दरियागंज इलाके में बुधवार दोपहर जर्जर इमारत का पिछला हिस्सा गिरने के बाद वहां काम करने वाले मजदूरों ने इमारत के मालिक व ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इनका कहना है कि बिना सुरक्षा उपकरण दिए ही उनसे इमारत तोड़ने का काम करवाया जा रहा था।
कई बार ठेकेदार व मालिक से सुरक्षा उपकरणों की डिमांड की थी लेकिन उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया गया। ऐसे में उनकी लापरवाही के कारण हादसा हो गया।
हादसे के बाद पुलिस सभी मजदूरों के बयान दर्ज कर रही है। जांच के लिए क्राइम टीम व एफएसएल ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि तीसरी मंजिल के लिंटर का एक बड़ा हिस्सा दूसरी मंजिल पर आ गिरा था।
पार्क की दीवार के साथ जमींदोज हो गया पिछला हिस्सा
इस कारण इमारत का पिछला हिस्सा सद्भावना पार्क की दीवार के साथ जमींदोज हो गया। यदि पूरी इमारत गिरती तो हादसे में मृतकों की संख्या बढ़ सकती थी। हादसे के समय यहां पर करीब पंद्रह मजदूर काम कर रहे थे। पुलिस उपायुक्त निधिन वाल्सन का कहना है कि ठेकेदार व इमारत मालिकों की तलाश की जा रही है।
इस कारण इमारत का पिछला हिस्सा सद्भावना पार्क की दीवार के साथ जमींदोज हो गया। यदि पूरी इमारत गिरती तो हादसे में मृतकों की संख्या बढ़ सकती थी। हादसे के समय यहां पर करीब पंद्रह मजदूर काम कर रहे थे। पुलिस उपायुक्त निधिन वाल्सन का कहना है कि ठेकेदार व इमारत मालिकों की तलाश की जा रही है।
मजदूर तुरफान ने बताया कि पिछले करीब 17 जुलाई से सभी मजदूर यहां काम कर रहे हैं। ज्यादातर मजदूरों के परिवार के लोग आनंद विहार में रहते हैं। ठेकेदार ने दूर होने की वजह से सभी को कहा था कि वह रात के समय यहीं पर रुक जाया करें। रोजाना की तरह सुबह 8.30 बजे मजदूरों ने काम शुरू किया।
दूसरी मंजिल पर मलबा हटा रहे थे मजदूर
तुरफान ने बताया कि वह भूतल पर मौजूद था। ज़ुबैर, गुल सागर और तौफीक दूसरी मंजिल पर मलबा हटा रहे थे। इस बीच करीब 12 बजे तीसरी मंजिल के लिंटर का कुछ हिस्सा दूसरी मंजिल पर गिरा। पार्क की दीवार कमजोर थी। इमारत के साथ दीवार भी गिर गई और हादसा हो गया। इमारत का हिस्सा गिरते ही सभी ने शोर मचा दिया।
तुरफान ने बताया कि वह भूतल पर मौजूद था। ज़ुबैर, गुल सागर और तौफीक दूसरी मंजिल पर मलबा हटा रहे थे। इस बीच करीब 12 बजे तीसरी मंजिल के लिंटर का कुछ हिस्सा दूसरी मंजिल पर गिरा। पार्क की दीवार कमजोर थी। इमारत के साथ दीवार भी गिर गई और हादसा हो गया। इमारत का हिस्सा गिरते ही सभी ने शोर मचा दिया।
आसपास भी कई दूसरी इमारतों में काम चल रहा था। वहीं पार्क में भी कई लोग मौजूद थे लेकिन कोई मदद के लिए आगे नहीं आया। तुरफान ने बताया कि उन्होंने अपने साथी इरशाद मकबूल व अन्य लोगों के साथ मलबा हटाना शुरू किया। मलबे से सबसे पहले तौफीक को निकाला गया। इसके बाद जुबैर को बाहर निकाला।
इस बीच दमकल व बचाव दल भी मौके पर पहुंच गए। दमकलकर्मियों ने जेसीबी की मदद से मलबा हटाकर गुल सागर को निकालकर अस्पताल भेजा। ज्यादातर मजदूरों ने मकान मालिक व ठेकेदार के खिलाफ ही बयान दिया है। उसके आधार पर पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।