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Delhi : रिज में पेड़ों की कटाई... सुप्रीम कोर्ट ने एलजी से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा, भ्रामक जानकारी पर नाराजगी

Thu, 17 Oct 2024 06:21 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 17 Oct 2024 06:21 AM IST
सार

रिज क्षेत्र में इस साल फरवरी में पेड़ काटे गए थे। शीर्ष अदालत ने डीडीए के उपाध्यक्ष सुभाषिश पांडा की तरफ से भ्रामक हलफनामा दायर करने पर नाराजगी भी जताई।

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Delhi: Cutting of trees in the ridge... Supreme Court asks for personal affidavit from LG
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के चेयरपर्सन व दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना को राष्ट्रीय राजधानी के रिज क्षेत्र में पेड़ों की कटाई से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर पूरी जानकारी के साथ व्यक्तिगत हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। रिज क्षेत्र में इस साल फरवरी में पेड़ काटे गए थे। शीर्ष अदालत ने डीडीए के उपाध्यक्ष सुभाषिश पांडा की तरफ से भ्रामक हलफनामा दायर करने पर नाराजगी भी जताई।

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भारत के मुख्य न्यायाधीश(सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने डीडीए के उपाध्यक्ष सुभाषिश पांडा के खिलाफ अदालत द्वारा शुरू किए गए अवमानना मामले में यह आदेश पारित किया। जिसमें कथित तौर पर सीएपीएफआईएमएस अस्पताल की सड़क को चौड़ा करने के लिए लगभग 1100 पेड़ों की कटाई की गई थी।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्र की पीठ रिज क्षेत्र में पेड़ों की कटाई पर डीडीए उपाध्यक्ष और अन्य के खिलाफ अवमानना मामले में सुनवाई कर रही थी। इसमें कथित तौर पर केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) आईएमएस अस्पताल की सड़क को चौड़ा करने के लिए लगभग 1,100 पेड़ काटे गए थे। शीर्ष अदालत ने डीडीए अध्यक्ष से मुख्य रूप से चार मुद्दों पर जानकारी देने को कहा है। पहला, क्या उनसे पेड़ों को काटने के लिए इस अदालत से अनुमति लेने के संबंध में कोई चर्चा हुई थी। 
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दूसरा, उन्हें को कब बताया गया कि पेड़ों की कटाई के लिए अदालत की अनुमति की जरूरत है। तीसरा, 16 फरवरी और उसके पास पेड़ों की कटाई शुरू हुई, क्या यह काम इस न्यायालय के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किए जाने से भी पहले किया गया। और चौथा, पेड़ों की कटाई से हुए नुकसान की भरपाई और रिज की प्राचीन प्रकृति को संरक्षित करने के लिए (एससी) आदेश के बाद से दोषी अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।

हलफनामा में लकड़ी के निपटान की जानकारी दें : सुनवाई के दौरान सीजेआई ने सीजेआई ने पूछा, लकड़ी कहां गई। 1100 पेड़ काटे गए हैं। लकड़ी कब हटाई गई? इस पर उपराज्यपाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने कहा, मैं लकड़ी की निगरानी नहीं करता, डीडीए जानता है। सीजेआई ने कहा कि एलजी के हलफनामे में यह भी स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि काटे गए पेड़ों की लकड़ी का किस तरह से निपटान किया गया है।

पेड़ों को काटने का निर्देश देने का आरोप : सुनवाई के दौरान अवमानना याचिकाकर्ता बिंदु कपूरिया की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने पीठ को मामले की संक्षिप्त पृष्ठभूमि और जस्टिस अभय एस ओका की अगुवाई वाली पिछली पीठ की ओर से पारित विभिन्न आदेशों का सारांश पेश किया। 

उन्होंने कहा कि सच्चाई को छिपाने के कई प्रयास किए गए हैं और ऐसी परिस्थितियां हैं जो दर्शाती हैं कि दिल्ली के उपराज्यपाल ने खुद पेड़ों को काटने का निर्देश दिया था। जेठमलानी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि एलजी ने पेड़ों को काटने का कोई निर्देश नहीं दिया था।


एलजी से दोषी पर कार्रवाई की उम्मीद
पीठ ने यह भी कहा कि उसे उम्मीद है कि एलजी सुनवाई की अगली तारीख (22 अक्टूबर) तक कोर्ट के किसी निर्देश का इंतजार किए बिना अनुशासनात्मक कार्यवाही या आपराधिक अभियोजन के रूप में दोषी अधिकारियों की ओर से जवाबदेही तय करने के लिए कदम उठाएंगे। अदालत ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों से पता चला है कि अध्यक्ष ने 3 फरवरी, 2024 को साइट का दौरा किया था और सड़क चौड़ीकरण प्रक्रिया को तेज करने का निर्देश दिया था। हालांकि यह देखते हुए कि रिकॉर्ड पर सामग्री थोड़ी अस्पष्ट थी, न्यायालय ने कहा कि उसे कुछ तथ्यात्मक स्पष्टीकरण की आवश्यकता है।

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