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आप पर भारी जुर्माना लगा दूं: केजरीवाल को सीएम पद से हटाने की मांग वाली याचिका पर फटकार, हाईकोर्ट ने की टिप्पणी

Mon, 08 Apr 2024 02:20 PM IST
अनुज कुमार पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Mon, 08 Apr 2024 02:20 PM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग वाली याचिका पर फटकार लगाते हुए कहा कि ये प्रचार के लिए दायर की गई। क्यों न मैं आपके ऊपर भारी जुर्माना लगा दूं।

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delhi Court transfers petition seeking removal of Kejriwal as Chief Minister
दिल्ली हाईकोर्ट और अरविंद केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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उच्च न्यायालय ने सोमवार को आबकारी मामले में आरोपी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पद से हटाने की मांग करने वाले आम आदमी पार्टी (आप) के एक पूर्व विधायक संदीप कुमार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा इसी मुद्दे पर पहले ही दो याचिकाएं खारिज कीर गई है और यह मात्र प्रचार पाने के लिए है। ऐसे में उन पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने याचिका दायर करने के लिए याचिकाकर्ता संदीप कुमार की आलोचना करते हुए कहा इसी तरह के मामलों को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन की पीठ ने सुना और खारिज कर दिया था और वर्तमान याचिका एक प्रचार हित याचिका के अलावा कुछ नहीं है।

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उन्होंने याचिका को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की पीठ को स्थानांतरित करते हुए कहा कि उस पीठ ने पहले भी इसी तरह की याचिकाओं पर सुनवाई की थी। हालही में पीठ ने इसी तरह के सभी मामलों को एक साथ सुनवाई करने का निर्देश देेत हुए अपने पास याचिकाएं स्थानांतरित कर ली थी। केजरीवाल को सीएम पद से हटाने की यह तीसरी याचिका है।

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इससे पहले, 28 मार्च को, उच्च न्यायालय ने सुरजीत सिंह यादव नामक व्यक्ति द्वारा दायर एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट ने तब कहा था कि इस मुद्दे की जांच करना कार्यपालिका और राष्ट्रपति का काम है और कोर्ट इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

इसके बाद 4 अप्रैल को, कोर्ट ने विष्णु गुप्ता, जो हिंदू सेना के अध्यक्ष हैं, की एक अन्य जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह केजरीवाल का निजी फैसला होगा कि वह सीएम बने रहेंगे या नहीं। पीठ ने टिप्पणी की थी कि कभी-कभी, व्यक्तिगत हित को राष्ट्रीय हित के अधीन करना पड़ता है लेकिन यह उनका (केजरीवाल का) निजी फैसला है।


तीसरी याचिका, एक रिट याचिका, संदीप कुमार द्वारा दायर की गई थी जिसमें कहा गया था कि केजरीवाल अक्षम होने के बावजूद दिल्ली के मुख्यमंत्री के पद पर बने हुए हैं जो न केवल कई संवैधानिक जटिलताओं को जन्म देता है बल्कि लोगों के जीवन के अधिकार की गारंटी का भी उल्लंघन करता है।

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