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मौत के बाद ICU में मासूम के चेहरे पर चल रही थीं चींटियां, अदालत ने लापरवाह डॉक्टरों को जारी किया समन

Wed, 28 Aug 2019 01:25 PM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Prachi Priyam Updated Wed, 28 Aug 2019 01:25 PM IST
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Delhi court summons five doctors of Taneja Hospital for Negligence in treatment
तनेजा अस्पताल-जैन चैरिटेबल ट्रस्ट अस्पताल - फोटो : Social Media

दिल्ली की कड़कड़डूमा जिला अदालत ने इलाज में लापरवाही के कारण दस माह के बच्चे की मौत के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए पांच डॉक्टरों को बतौर आरोपी समन जारी किया है। मामला प्रीत विहार के तनेजा अस्पताल का है, जहां साल 2012 में इलाज में हुई लापरवाही के एक बच्चे की मौत हो गई थी। स्थिति यह थी कि मौत के बाद आईसीयू में बच्चे के चेहरे पर चींटियां चल रही थीं।

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इसके बाद सीलमपुर निवासी रेनू त्यागी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और मामले की शिकायत की थी। अब कड़कड़डूमा जिला अदालत के एसीएमएम अनुज अग्रवाल ने उनकी शिकायत पर सुनवाई करते हुए दो अस्पतालों के चार डॉक्टरों व इनमें से एक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को बतौर आरोपी समन जारी कर पेश होने का निर्देश दिया है। इन डॉक्टरों को लापरवाही से मौत संबंधी धाराओं में समन जारी किया गया है।
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शिकायतकर्ता महिला रेनू त्यागी ने इन डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने से बच्चे की मौत का आरोप लगाया था। महिला का आरोप था कि इन डॉक्टरों ने लाखों रुपये लेने के बाद भी अपना काम नहीं किया। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने भी इन डॉक्टरों के नाम तीन माह के लिए अपने रजिस्टर से हटा दिया है। 

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एमसीआई ने भी हटा दिए थे डॉक्टरों के नाम

एमसीआई ने भी अपनी पड़ताल के बाद गांधी नगर स्थित जैन चैरिटेबल ट्रस्ट अस्पताल के डॉक्टर ओम प्रकाश व राकेश त्यागी और प्रीत विहार स्थित तनेजा अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को लापरवाही का दोषी पाया था। हालांकि रिपोर्ट में तनेजा अस्पताल के डॉक्टर राकेश कुमार जैन व शेफाली चौहान के आचरण पर कुछ नहीं कहा गया है। 

इसके बाद एमसीआई ने इनके नाम रजिस्टर से हटाने का निर्देश दिया था। अदालत ने एमसीआई की रिपोर्ट के बाद भी आरोपी डॉक्टरों पर कार्रवाई न करने वाले पुलिस वालों के खिलाफ जांच करने का निर्देश पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त को दिया है। हालांकि पुलिस ने रेनू की शिकायत पर 2014 में कई डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। 

अदालत ने कहा कि वह पुलिस की सुस्ती व लापरवाही से आहत हुई है। दस माह के बच्चे की मौत के बाद भी पुलिस नहीं जागी और संबंधित पुलिस अधिकारी एमसीआई की रिपोर्ट को दबाकर बैठे रहे। 

आईसीयू में बच्चे के चेहरे पर चल रही थीं चींटियां

Delhi court summons five doctors of Taneja Hospital for Negligence in treatment
तनेजा अस्पताल-जैन चैरिटेबल ट्रस्ट अस्पताल - फोटो : Social Media

कोर्ट में शिकायत दायर कर रेनू त्यागी ने कहा कि उसने अपने दस माह के बच्चे को इलाज के लिए 28 नवंबर 2012 को जैन चैरिटेबल ट्रस्ट अस्पताल में भर्ती करवाया था। अस्पताल ने कुछ समय बाद बच्चे को प्रीत विहार स्थित तनेजा अस्पताल में शिफ्ट करवा दिया था। वहां इलाज के दौरान बच्चे की तबीयत बिगड़ गई थी। अस्पताल ने इलाज के लिए साढ़े तीन लाख रुपये वसूले थे। 

बच्चे के इलाज के दौरान शिकायतकर्ता उसे देखने आईसीयू में गई थी। वह यह देखकर हिल गई थी कि उसके बच्चे के चेहरे पर चींटियां चल रही थीं। जब उसने डॉक्टर से कहा तो उन्होंने जवाब दिया कि हमारा काम इलाज करना है चींटियां हटाना नहीं।

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