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दिल्ली: बारहवीं की मूल्यांकन प्रक्रिया पर समिति ने नहीं सौंपी रिपोर्ट
Tue, 15 Jun 2021 04:28 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Tue, 15 Jun 2021 04:28 PM IST
सार
- समिति को सोमवार को सौंपनी थी रिपोर्ट, अभी लग सकते हैं कुछ दिन
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CBSE
- फोटो : social media
विस्तार
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से बारहवीं के छात्रों की मूल्यांकन प्रक्रिया पर सुझाव देने के लिए गठित समिति ने अभी अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। मूल्यांकन प्रक्रिया पर सुझाव देने के लिए गठित 13 सदस्यीय समिति को सोमवार तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी। सूत्र बताते हैं कि इसमें अभी कुछ दिन लग सकते हैं। समिति केज्यादातर सदस्य मूल्यांकन के लिए दसवीं, ग्यारवीं व बारहवीं के प्री बोर्ड तथा आंतरिक परीक्षाओं को आधार बनाने के लिए सहमत हैं। लेकिन इस संबंध में अब तक कुछ भी फाइनल नहीं हुआ है।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बीते सप्ताह केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि बारहवीं कक्षा के मूल्यांकन के लिए दसवीं, ग्यारवीं व बारहवीं के प्री बोर्ड के अंकों को आ्धार बनाया जाए। कोविड-19 महामारी को देखते हुए एक जून को बारहवीं की बोर्ड परीक्षाएं रद कर दी गई थी।
जिसके बाद बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सुझाव देने के लिए एक 13 सदस्यीय समिति गठित की थी। सूत्र बताते हैं कि विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जा रही हैं जिससे कि जो भी मानदंड बनें वह छात्र हितैषी हों। स्कूल, छात्र, अभिभावक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि किस तरह के मानदंड तय किए जाएंगे। विशेषज्ञ कहते हैं कि बोर्ड को जल्द से जल्द मानदंड तय करके जारी करने चाहिए जिससे कि बच्चों व अभिभावकों का तनाव कम हो सके।
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उल्लेखनीय है कि दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बीते सप्ताह केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि बारहवीं कक्षा के मूल्यांकन के लिए दसवीं, ग्यारवीं व बारहवीं के प्री बोर्ड के अंकों को आ्धार बनाया जाए। कोविड-19 महामारी को देखते हुए एक जून को बारहवीं की बोर्ड परीक्षाएं रद कर दी गई थी।
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जिसके बाद बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सुझाव देने के लिए एक 13 सदस्यीय समिति गठित की थी। सूत्र बताते हैं कि विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जा रही हैं जिससे कि जो भी मानदंड बनें वह छात्र हितैषी हों। स्कूल, छात्र, अभिभावक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि किस तरह के मानदंड तय किए जाएंगे। विशेषज्ञ कहते हैं कि बोर्ड को जल्द से जल्द मानदंड तय करके जारी करने चाहिए जिससे कि बच्चों व अभिभावकों का तनाव कम हो सके।
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