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Delhi Car Blast: धमाके के 'सह-साजिशकर्ता' जसिर बिलाल को राहत, वकील से NIA रिमांड में मिलने की मिली मंजूरी

Sat, 22 Nov 2025 05:15 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Sat, 22 Nov 2025 05:15 PM IST
सार

दिल्ली कार धमाके के 'सह-साजिशकर्ता' जसिर बिलाल को वकील से मिलने के लिए कोर्ट ने शनिवार को मंजूरी दे दी। पटियाला हाउस कोर्ट की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने यह याचिक मंजूर की है।

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Delhi Car Blast 'co-conspirator' Jasir Bilal allowed to meet lawyer in NIA remand
पटियाला हाउस कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : भूपिंदर सिंह

विस्तार

राष्ट्रीय जांच एजेंसी के विशेष न्यायालय ने पटियाला हाउस कोर्ट में आरोपी जसिर बिलाल वानी उर्फ दानिश की याचिका को मंजूरी दे दी है। इसके तहत एनआईए मुख्यालय में रिमांड के दौरान उसे वैकल्पिक दिनों पर वकील से मिलने की अनुमति दी गई है। अदालत ने आरोपी की ओर से दायर याचिका पर विचार किया। 

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जासिर की गिरफ्तारी 17 नवंबर को श्रीनगर से हुई थी और 18 नवंबर को उसे 10 दिनों की एनआईए हिरासत में भेज दिया गया था। एनआईए ने दावा किया कि जसिर आतंकी मॉड्यूल का सक्रिय सह-षड्यंत्रकारी था, जो सुसाइड बॉम्बर डॉ. उमर उन नबी का करीबी सहयोगी था।

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आरोपी बिलाल की याचिका हाईकोर्ट ने कल की थी खारिज
हाईकोर्ट ने लालकिला धमाके के आरोपी जासिर बिलाल वानी उर्फ दानिश की याचिका को खारिज कर दिया है। बिलाल ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) मुख्यालय में वकील से मिलने की अनुमति मांगी थी। न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा की एकल पीठ ने सख्त लहजे में कहा कि तुम कोई खास नहीं हो। हम किसी एक व्यक्ति के लिए प्रक्रिया नहीं बदल सकते। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील पर भरोसा न करने का आधार स्पष्ट करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट से याचिका की मौखिक अस्वीकृति का कोई लिखित आदेश उपलब्ध नहीं है।

बिलाल ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी मुख्यालय में वकील से मिलने की अनुमति मांगी थी
अनंतनाग जिले के काजीगुंड निवासी बीएससी के छात्र को एनआई ने हिरासत में लिया था। एनआईए का आरोप है कि बिलाल ने आतंकी मॉड्यूल को तकनीकी सहायता प्रदान की थी जिसमें ड्रोन संशोधन, रॉकेट निर्माण और हमले की क्षमता बढ़ाने जैसे काम शामिल हैं। जांचकर्ताओं का दावा है कि वह उमर उन नबी का सहयोगी और साजिश का सक्रिय हिस्सा था। 18 नवंबर को उसे 10 दिनों की एनआईए हिरासत में भेजा गया था। याचिका में बिलाल के वकील कौस्तुभ चतुर्वेदी ने दावा किया कि एनआईए मुख्यालय में वकील को आरोपी से मिलने से रोका गया क्योंकि कोर्ट का कोई आदेश नहीं था। इसके बाद पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दाखिल की गई लेकिन सेशन जज ने इसे मौखिक रूप से खारिज कर दिया।

न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने सीधे हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि तुम्हारी बात पर क्यों भरोसा करूं। कोई आकर कह दे कि मौखिक रूप से खारिज हो गया तो हर कोई यही कहेगा। हम प्रक्रिया का पालन करते हैं और किसी के लिए नई प्रक्रिया नहीं बना सकते। हालांकि, कोर्ट ने वैकल्पिक प्रार्थना स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह याचिका पर कानून के अनुसार विचार कर आदेश पारित करे। मामला शनिवार को सेशन जज के समक्ष लंबित रहेगा।

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