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दिल्ली की सबसे जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं CM केजरीवाल

Fri, 05 Jun 2015 02:13 PM IST
Updated Fri, 05 Jun 2015 02:13 PM IST
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Delhi breathing air thick with ozone

गर्मी ने दिल्ली-एनसीआर में सांस और अस्थमा रोगियों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। बीते एक महीने में चढ़ते पारे ने दिल्ली की आबोहवा में ओजोन की मात्रा बढ़ा दी है।

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कई इलाकों में यह मानक से दो गुना तक ज्यादा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने दिल्ली पॉल्युशन कंट्रोल कमेटी (डीपीसीसी) के ऑनलाइन मॉनीटरिंग स्टेशन से ओजोन की मात्रा का अध्ययन किया है। इसकी तस्वीर बेहद डरावनी है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवासीय इलाके सिविल लाइंस में ओजोन का स्तर मानक से दो गुना ज्यादा है। एक महीने में इसकी मात्रा सबसे ज्यादा 250 माइक्रोग्राम/घनमीटर तक रही।

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बारिश न होती तो होता और बुरा हाल

Delhi breathing air thick with ozone

यह मानक से 2.5 गुना ज्यादा है। आरकेपुरम, पंजाबी और मंदिर मार्ग की हालत भी जुदा नहीं है। चारों मॉनिटरिंग स्टेशनों पर ओजोन का स्तर तेजी से बढ़ा है।


सीएसई की कार्यकारी निदेशक अनुमिता राय चौधरी के मुताबिक, दिल्ली के लिए यह चेतावनी है। हालात इससे भी बदतर होते, अगर मार्च-मई में बीच-बीच में बारिश न होती।

इसकी बड़ी वजह वाहनों से होने वाला प्रदूषण है। खास तौर से डीजल से चलने वाले वाहनों से, पेट्रोल के वाहन की तुलना में जिनसे तीन गुना ज्यादा नॉक्स निकलता है।

गर्मियों में ऐसे बनती है ओजोन

Delhi breathing air thick with ozone

ओजोन कहीं से खुद नहीं निकलती। नाइट्रोजन के ऑक्साइड, सल्फर डाई आक्साइड और हाइड्रो कार्बन उच्च तापमान में क्रिया करके ओजोन बनाते हैं। तापमान ज्यादा होने से ओजोन की मात्रा तेजी से बढ़ती है। वहीं, सर्दियों में इसका स्तर नियंत्रित रहता है।

बेहद खतरनाक यह
ओजोनयुक्त वातावरण में कुछ घंटों के भीतर ही खराब होती है सेहत।
श्वसन और अस्थमा के मरीजों को बड़ी दिक्कत।
फेफेड़ों पर पड़ता है असर, ऊतक क्षतिग्रस्त होते हैं।
सीने में दर्द, कफ की समस्या और सिरदर्द की परेशानी।
ब्रोंकाइटिस और एम्फजीम के रोगियों की भी बढ़ी समस्या।
ओजोन के ऑक्सीकारक होने से कोशिकाओं को भी नुकसान।

ये एहतियात जरूरी
डीजल से चलने वाले वाहनों पर रोक।
वाहनों की संख्या में कमी लाने के लिए बड़े स्तर पर योजना।
ऐसे इलाकों में जहां के वातावरण में ओजोन बहुत ज्यादा है, वहां डीजल और पेट्रोल की जगह ग्रीन फ्यूल वाले वाहनों के चलने की हो इजाजत।
हेल्थ बुलेटिन जारी हो, खास तौर से वहां के लिए जहां सांद्रण बहुत ज्यादा है।

कंक्रीट के जंगल में गमलों के जरिये फैली हरियाली

Delhi breathing air thick with ozone

शॉपिंग कॉंप्लेक्स, आवासीय योजनाएं और विकास कार्यों के चलते कंक्रीट के जंगल में तब्दील होते शहर में दिल्ली वाले घरों के अंदर गमलों से पर्यावरण सुरक्षा का संदेश दे रहे हैं।

शहर में ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जो घरों में पौधों के जरिये ही अपने छत की सुंदरता बनाए हुए हैं। राजधानी में सरकार के अलावा बाकायदा वेबसाइट से भी लोगों को आबोहवा दुरुस्त रखने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

नासा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ते प्रदूषण से सड़क पर ही नहीं, घर के अंदर भी सेहत खराब हो रही है, क्योंकि छोटे घरों में खिड़कियों की कमी के चलते ताजी हवा अंदर नहीं आ पाती।

इस वेबसाइट के माध्यम से जगा रहे हैं जागरूकता

Delhi breathing air thick with ozone

हालांकि हम छोटे-छोटे पौधे लगाकर ऑक्सीजन की कमी को पूरा कर सकते हैं। पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले अतुल विशिष्ट के मुताबिक, लोगों को घरों के अंदर और फ्लैट की बालकनी में पौधे लगाने के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूडॉटहोमएंडगार्डनलाइफडॉटकॉम एनसीआर में लोगों को जागरूक कर रहे हैं।

इसमें पौधों की विविधता, किस मौसम में कैसे लगाएं और पौधा कितनी ऑक्सीजन छोड़ता है, जैसी जानकारी दी जा रही है।

दरियागंज अंसारी रोड निवासी अशोक ने जमीन की कमी होने पर भी गो ग्रीन का नारा दिया है। उन्होंने अपने घर की बालकनी समेत छत पर पेड़-पौधे गमलों में लगा रखे हैं। हरियाली के चलते दूर से ही मकान आकर्षक लगता है।

ये पौधे देंगे ताजगी

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पीस लिली, रबड़ प्लांट गेरबेडा डैजी, स्पाइडर प्लांट, स्नेक प्लांट, चाइनीज एवरग्रीन, इंग्लिश एलवीवाई, विपिंग फिग, रेड ऐज, ड्रासीना, हार्टलीफ आदि को बेडरूम, बालकनी, डाइनिंग टेबल, फ्रिज आदि पर रखा जा सकता है।

यदि रखने की जगह न हो तो उन्हें लटकाकर रखा जा सकता है। यह ऐसे प्लांट हैं, जिनमें पानी समेत मेहनत भी कम करनी पड़ती है।

खादी भवन में ग्रीन स्टेशनरी एग्जीबिशन
खादी और ग्रामोद्योग भवन पर्यावरण बचाने की पहल कर रहा है। इस कड़ी में कनॉट प्लेस स्थित खादी भवन में प्रदर्शनी लगाई जा रही है, जिसमें कागज के बजाय हाथ से तैयार उत्पादों को शामिल किया गया है। प्रदर्शनी को ग्रीन स्टेशनरी का नाम दिया गया है।

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