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Delhi : वोटिंग खत्म होते ही राजनीतिक दलों में जीत-हार पर मंथन, मतदान प्रतिशत पर चल रहा है सियासी गुणा-भाग

Sun, 26 May 2024 06:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 26 May 2024 06:05 AM IST
सार

राजनीतिक पार्टियों में जीत-हार को लेकर मंथन के लिए देश शाम होते ही बैठकें शुरू हो गईं थीं।

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Delhi: As soon as the voting is over, political parties are discussing the victory and defeat
demo - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी में मतदान संपन्न होने के साथ ही सियासी गुणा-भाग का दौर शुरू हो गया। राजनीतिक पार्टियों में जीत-हार को लेकर मंथन के लिए देश शाम होते ही बैठकें शुरू हो गईं थीं। प्रत्याशियों की हार-जीत का फैसला तो 4 जून को ही तय होना हैं, लेकिन तीनों प्रमुख राजनीतिक दल जीत के अपने-अपने फार्मूलों पर चर्चा में व्यस्त रहे। पेश है भाजपा व आप-कांग्रेस गठबंधन के रणनीतिकारों से बातचीत पर आधारित नवनीत शरण की रिपोर्ट...

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वोटिंग प्रतिशत और वोटिंग पैटर्न को लेकर सियासतदान मंथन कर रहे हैं। सभी लोकसभा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में हुए मतदान को भाजपा दिल्ली सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ मान रही है। यह भी दावा है कि प्रधानमंत्री को तीसरी बार प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठाने के लिए जनता घरों से बाहर निकली है। वहीं, गठबंधन यह मानकर चल रहा है कि दिल्ली के मतदाता गठबंधन की वजह से छिटके नहीं हैं। बदलाव के लिए लोग घरों से  बाहर निकले हैं और बढ़चढ़कर मतदान किया है। मतदाताओं को एक नया विकल्प मिला है। 
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युवा, महिला और मध्य वर्ग के बढ़-चढ़कर वोटिंग करने से राजनीतिक पार्टियों की आस बंधी है। भाजपा का दावा है कि मोदी लहर लगातार तीसरे चुनाव में भी कायम है। राम मंदिर को लेकर युवाओं, महिलाओं और मध्य वर्ग में जोश है। भ्रष्टाचार की वजह से युवा वर्ग कांग्रेस से तो पहले ही कटा था, अब आम आदमी पार्टी से भी दूर चला गया है। खासकर गठबंधन होने से तीनों वर्ग भाजपा के पक्ष में आ गए हैं। वहीं, आप व कांग्रेस रणनीतिकारों का कहना है कि युवा और महिलाओं ने बदलाव के संकेत दिए हैं। महिलाएं केजरीवाल को गिरफ्तार करने से नाराज हैं और सहानुभूति लहर में वोट देने निकली हैं। सस्ती बिजली-पानी मिलने से उन्हें राहत दिल्ली में मिल रही है। 

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  • झुग्गी और अनधिकृत कॉलोनियों के वोटरों को लेकर भी राजनीतिक दलों का अपना फार्मूला है। भाजपा का कहना है कि दिल्ली के शहरी आबादी वाले मतदाता हों या अनधिकृत कॉलोनी में रहने वाले, उन्हें पता है कि लोकसभा चुनाव प्रधानमंत्री बनाने के लिए होता है। स्थानीय समस्या के लिए एमीसडी व विधानसभा चुनाव होता है। पिछले कई चुनाव में यह देखा भी गया है। लिहाजा, न केवल अनधिकृत कॉलोनियां, बल्कि झुग्गी झोपड़ी के मतदाताओं ने भी मोदी में विश्वास व्यक्त करके वोट दिया है। वहीं, गठबंधन की माने तो पिछले चुनाव में ये वर्ग जरूर बंट गया है, लेकिन इस चुनाव में एकतरफा वोटिंग पैटर्न गठबंधन के पक्ष में गया है।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली, पूर्वी दिल्ली और पश्चिमी दिल्ली के वोटिंग पैटर्न को समझते हुए गठबंधन पूरी तरह से जीत के प्रति आश्वस्त है। रणनीतिकारों की माने तो मुस्लिम और सिख-पंजाबी मतदाताओं ने तीनों लोकसभा क्षेत्रों में गठबंधन के उम्मीदवारों को वोट दिया है। वहीं, भाजपा का मानना है कि अल्पसंख्यक इलाकों के मतदान केंद्रों पर हिंदू मतदाताओं ने भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है। चुनाव में अल्पसंख्यक वर्ग का वोट नहीं बंटा है। 

भाजपा यह मान कर चल रही है कि कांग्रेस और आप के गठबंधन की वजह से दोनों पार्टियों के परंपरागत वोट में सेंध लगी है। एक दूसरे की खिलाफत करने वाली पार्टियों एक मंच पर आने से लोगों में नाराजगी है, क्योंकि कांग्रेस कैडर को यह चिंता सता रही है कि उनका वजूद ही आने वाले समय न खत्म हो जाए। कार्यकर्ताओं में भी इस बात को लेकर नाराजगी है, यही वजह है कि कई इलाकों में बूथ खाली नजर आए। वहीं, गठबंधन इस बात को लेकर खुश है कि सत्ता से दूर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार हुआ है। उन्हें भी अपनी पार्टी के उम्मीदवार को मजबूती के साथ लोकसभा तक पहुंचाने का मौका है।

20-22 प्रतिशत फ्लोटिंग वोटरों के हाथ में जीत की कुंजी
चुनावी समर में राजनीतिक दल अंतिम समय तक फ्लोटिंग वोटरों पर निगाह रखते हैं। ये वे मतदाता होते हैं जो चुनाव के दिन तक असमंजस की स्थिति में होते हैं। इनका रुख उधर ही होता है जिधर हवा का रुख होता है। यही वोटर प्रत्याशियों की जीत की कुंजी माने जाते हैं। लिहाजा पार्टी इनके वोटिंग पैटर्न पर माथा-पच्ची कर रही है। राजनीति के जानकार बताते हैं कि 20-22 प्रतिशत फ्लोटिंग मतदाता है, जो किसी भी पार्टी के समर्थक नहीं होते हैं। 

  • भाजपा का मत है कि 40 प्रतिशत परंपरागत वोट उसके अपने हैं। फ्लोटिंग वोटर जीतने वाले के पक्ष में मतदान करते हैं। भाजपा 400 के पार जा रही है। लिहाजा, इन मतदाओं ने भाजपा को ही वोट दिए हैं। वहीं, गठबंधन का कहना है कि सत्ता परिवर्तन के लिए ये वोट हमें मिले हैं।
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