Delhi Pollution: दिल्ली की हवाओं में लौटेगा दम, सरकार ने उठाया बड़ा कदम, हथियार का नाम है ‘मिस्ट स्प्रे ड्रोन’
Delhi Air Pollution: राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार ‘मिस्ट स्प्रे ड्रोन’ तकनीक का इस्तेमाल करने जा रही है। आनंद विहार इलाके में इसका पहला परीक्षण हुआ। हॉटस्पॉट इलाकों में ड्रोन की मदद के पानी का छिड़काव यानी पानी का स्प्रे होगा। जिससे प्रदूषण में कमी आएगी।
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Delhi Pollution: देश की राजधानी दिल्ली इस वक्त सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर है और गैस चेंबर बना हुआ है। अब ऐसे में दिल्ली सरकार भी ड्रोन तकनीक का सहारा ले रही है। ड्रोन के बारे में हम सभी जानते हैं। ड्रोन एक मानव रहित हवाई वाहन होता है। जिसको वीडियोग्राफी, कृषि, डिलीवरी आदि के काम के लिए बनाया गया है। लेकिन अब सरकार इसका इस्तेमाल प्रदूषण को कम करने के लिए करने जा रही है। इससे पहले दिल्ली सरकार राजधानी में आर्टिफिशियल रेन कराने की तैयारी में थी। लेकिन केंद्र से मंजूरी नहीं मिलने के बाद दिल्ली सरकार ने यह कदम उठाया है।
क्या है ड्रोन तकनीक
भारत ही नहीं दुनिया में ड्रोन तकनीक को अपनाया गया है। ड्रोन, जिसे मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) कहा जाता है। यह वाहन रिमोट कंट्रोल के जरिए संचालित किया जाता है। इसका इस्तेमाल निगरानी, सैन्य अभियान, डिलीवरी, कृषि, बचाव अभियान से लेकर वीडियो-फोटोग्राफी तक किया जाता है।
‘मिस्ट स्प्रे ड्रोन’का होगा इस्तेमाल
बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को शहर के प्रदूषण हॉटस्पॉट में से एक आनंद विहार में 'ड्रोन-आधारित धुंध छिड़काव' का परीक्षण किया। परीक्षण के दौरान दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय भी मौजूद रहे। ड्रोन के माध्यम से पानी का छिड़काव होगा। एक बार में ड्रोन 15 लीटर पानी लेकर उड़ेगा।
सेंसर से लैस है ड्रोन
मंत्री गोपाल राय ने बताया कि वायु प्रदूषण स्रोतों की पहचान करने में ड्रोन मैपिंग तकनीक एक महत्वपूर्ण उपकरण है। सेंसर से लैस ड्रोन भीड़भाड़ वाले शहरी क्षेत्रों, औद्योगिक और उन क्षेत्रों तक पहुंचने में सक्षम हैं, जहां पारंपरिक तरीकों से निगरानी करना मुश्किल है। ड्रोन की तैनाती प्रदूषकों के फैलाव को बेहतर ढंग से समझने और नियमों का उल्लंघन करने वाले अनधिकृत औद्योगिक संचालन या निर्माण स्थलों जैसे महत्वपूर्ण हॉटस्पॉट की पहचान करने में सक्षम बनाती है।
गोपाल राय ने कहा कि हॉटस्पॉट में प्रदूषण का स्तर राजधानी के औसत एक्यूआई से अधिक है। दिल्ली भर में 200 से अधिक एंटी-स्मॉग गन तैनात हैं, जो हवा में उड़ने वाली धूल को कम करने के लिए सड़कों पर पानी का स्प्रे कर रही हैं। लेकिन संकरी सड़कों या भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में जहां ट्रक नहीं पहुंच सकते हैं उसके लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। आने वाले वक्त में इसका व्यापक तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। गोपाल राय ने आगे कहा कि अगर हमें आज के परीक्षण के अच्छे नतीजे मिलते हैं, तो हम अतिरिक्त ड्रोन खरीदने के लिए औपचारिक निविदाएं जारी करेंगे। दिल्ली की वायु गुणवत्ता हर दिन खराब होती जा रही है। 15 से अधिक निगरानी स्टेशन वर्तमान में एक्यूआई के स्तर को गंभीर श्रेणी में बता रहे है।
ड्रोन से खेती
ड्रोन का इस्तेमाल खेती और डिलीवरी के लिए परीक्षण के तौर पर हो चुका है। ड्रोन एक ऐसी ही तकनीक है, जिसमें कृषि क्षेत्र में क्रांति लाने की क्षमता है। इस तकनीक से जरूरत के अनुसार फसल उर्वरकों की सटीक मात्रा एवं सही प्रयोग के बारे में जानकारी मिलती है। इससे सीधे सामग्री के उपयोग की दक्षता में वृद्धि होती है। किसान भी सुरक्षित रहते हैं, साथ ही खेती की कुल लागत भी कम होती है। कृषि क्षेत्र में इस तकनीक को अपनाया जा रहा है।
ड्रोन से डिलीवरी
ड्रोन गंभीर रोगियों के लिए दवाओं की नियमित डिलीवरी सुनिश्चित कर सकते हैं और आपदाग्रस्त क्षेत्रों में भोजन, पानी और दवाओं जैसी आवश्यक आपूर्ति कर सकते हैं। चिकित्सा सेवाओं को विकेंद्रीकृत करके स्वास्थ्य सेवा को स्थानिक बनाने की उनकी क्षमता ग्रामीण आबादी के लिए बेहतर पहुंच सुनिश्चित करती है।