दिवाली से पहले दिल्ली बनी गैस चैंबर: पाकिस्तान से आ रही हवाएं घोंट रही दम, इस सीजन का सबसे अधिक एक्यूआई दर्ज
शुक्रवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 382 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। यह गुरुवार की तुलना में 13 अंक अधिक है। इस सीजन में अब तक का यह सबसे अधिक एक्यूआई दर्ज किया गया है।
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पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में खेतों में बड़े पैमाने पर पराली जलाने से उठने वाला धुआं उत्तर-पश्चिमी हवाओं के साथ मिलकर दिल्ली की हवा को जहरीला बना रहा है। शुक्रवार को लगातार पांचवें दिन वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की गई। यही नहीं, दिवाली से पहले ही दिल्ली की हवा गैस चैंबर बन गई है। हवा की रफ्तार कम होने के कारण आसमान में स्मॉग की घनी चादर छाई रही। रात में स्थिति और भी बिगड़ गई। प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी होने लगी है।
बेहद खराब श्रेणी में दिल्ली की हवा
शुक्रवार को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 382 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। यह गुरुवार की तुलना में 13 अंक अधिक है। इस सीजन में अब तक का यह सबसे अधिक एक्यूआई दर्ज किया गया है। भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के मुताबिक, शुक्रवार को औसतन 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पश्चिम से उत्तर दिशा की ओर हवाएं चलीं। वहीं, शनिवार को उत्तर-पश्चिम दिशा से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। रविवार को हवा की दिशा उत्तर-पूर्वी रहने की संभावना है और इसकी गति 10 से 12 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है। वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुमान के मुताबिक, सोमवार तक हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में पहुंचने की आशंका है। ऐसे में लोगों को प्रदूषित हवा से जल्द राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
मानकों से कई गुना अधिक पीएम2.5 और पीएम10
सीपीसीबी के अनुसार, हवा में मौजूद हानिकारक पीएम2.5 कणों के स्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। शुक्रवार शाम पांच बजे पीएम2.5 का स्तर 189.2 और पीएम10 का स्तर 329.3 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जो निर्धारित मानकों से कई गुना अधिक है। सीपीसीबी के अनुसार, पांच नवंबर को पराली जलाने की 154 घटनाएं दर्ज की गईं।
-वाहन से निकलने वाला प्रदूषण - 17.99
-पराली जलाने की घटनाएं - 14.209
-आवसीय - 4.48
-पेरिफेरल उद्योग - 3.685
-निर्माण गतिविधियां - 2.74
-सड़कों पर उड़ने वाली धूल - 1.37
पंजाब में सबसे ज्यादा जलाई गई पराली
इस साल 15 सितंबर से 2 नवंबर के बीच खेतों में आग लगने की कुल 3,535 घटनाएं दर्ज की गई हैं। पंजाब में सबसे अधिक 1,612 मामले सामने आए हैं। इसके बाद राजस्थान (738), मध्य प्रदेश (614), उत्तर प्रदेश (349), उत्तराखंड (176), हरियाणा (44) और दिल्ली (दो) मामले सामने आए हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में खेतों में आग लगने की घटनाओं में काफी कमी आई है। इसी अवधि के दौरान साल 2020 में आग लगने की 51,822 घटनाएं दर्ज की गई थीं।
30 नवंबर तक पराली जलाने की समस्याएं
यह 2021 में आंकड़ा घटकर 24,583 और 2022 में 26,490 पर आ गया। साल 2025 में 4,993 घटनाएं ही हुईं। इस साल 15 सितंबर से 2 नवंबर के बीच कुल 3,535 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। माना जाता है कि 15 सितंबर से 30 नवंबर तक पराली जलाने की घटनाएं होती हैं।
ये सावधानी जरूरी
एन-95 मास्क पहनें : यदि बाहर जाना बहुत जरूरी हो, तो हमेशा अच्छी फिटिंग वाला एन-95 मास्क पहनें। साधारण कपड़े या सामान्य सर्जिकल मास्क पीएम 2.5 कणों से पर्याप्त सुरक्षा प्रदान नहीं करते हैं।
एक्सरसाइज से बचें : सुबह और शाम के समय बाहर टहलने, दौड़ने या खुले में व्यायाम करने से बचें।
कमजोर समूह ध्यान दें: बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा (दमा) से पीड़ित लोगों को अधिक समय घर के अंदर ही रहने की सलाह दी जाती है।
खिड़की-दरवाजे बंद रखें: प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर घर के खिड़की और दरवाजे बंद रखें। हवा की गुणवत्ता बेहतर होने पर ही घर में ताजी हवा आने दें।
तरीका बदलें: घर में धूल साफ करने के लिए झाडू लगाने के बजाय गीले कपड़े से पोछा/सफाई करें।
धुएं से बचें: घर के अंदर अगरबत्ती, धूप या मच्छर भगाने वाली कॉइल जलाने से बचें।