दिल्ली: स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया के सदस्य अब्दुल्ला दानिश को स्पेशल सेल ने किया गिरफ्तार, 19 साल से था फरार
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी के 19 वर्षों से फरार सदस्य अब्दुल्ला दानिश को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने वर्ष 2008 में अहमदाबाद में बम धमाका करने वाले आतंकी को पनाह दी थी।
Delhi: Abdullah Danish, member of the banned organization Students Islamic Movement of India (SIMI), arrested by Special Cell of Delhi Police pic.twitter.com/Qq8GjzLSZs
— ANI (@ANI) December 6, 2020विज्ञापन
दिल्ली, मुंबई व अहमदाबाद में सीरियल बम धमाके करने वाले अब्दुल्ला के संपर्क में थे। कोर्ट ने इसे वर्ष 2002 में भगोड़ा घोषित कर दिया था। ये तभी से फरार था। दिल्ली पुलिस देशद्रोह और गैरकानूनी गतिविधियों के मामले में इसकी तलाश कर रही थी।
दिल्ली पुलिस के एनएफसी थाने में इसके खिलाफ मामला दर्ज है। स्पेशल सेल करीब एक वर्ष से इसे पकड़ने में लगी हुई थी। आरोपी पिछले 25 वर्षों में मुस्लिम वर्ग के काफी युवकों को उकसा कर जेहादी बना चुका है। हालांकि दिल्ली पुलिस सिमी को पूरी तरह खत्म कर चुकी है।
स्पेशल सेल डीसीपी प्रमोद कुशवाह के अनुसार स्पेशल सेल में तैनात एसीपी अत्तर सिंह को एक वर्ष पहले अब्दुल्ला की दिल्ली व यूपी में गतिविधियों के बारे में सूचना मिली थी कि वह एनआरसी व सीएए के विरोध में मुस्लिम वर्गों के युवकों को उसका रहा है और धार्मिक समूहों में भेदभाव पैदा कर रहा है। ये भी झूठा प्रचार कर रहा है कि भारत सरकार मुस्लिमों पर अत्याचार कर रही है।
अब्दुला को पकड़ने का टास्क इंस्पेक्टर शिव कुमार व कर्मवीर सिंह की टीम को दिया गया। इंस्पेक्टर शिव कुमार की टीम ने कई महीनों की सर्विलांस के बाद मूलरूप से गांव बंदीघाट, जिला मऊ यूपी निवासी अब्दुल्ला दानिश (58) को जाकिर नगर, जामिया नगर दिल्ली से शनिवार को गिरफ्तार कर लिया।
भारत सरकार ने सिमी पर 27 सितंबर, 2001 में प्रतिबंध लगा था। बावजूद सिमी के सदस्य जामिया नगर में प्रेसवार्ता कर रहे थे। दिल्ली पुलिस ने यहां दबिश देकर सिमी के काफी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया था। जामिया नगर स्थित सिमी के हैडक्वाटर से काफी आपत्तिजनक व देश विरोधी सामग्री, पोस्टर व वीडियो मिली थीं।
सिमी की मैगजीन का मुख्य संपादक रहा है
आरोपी ने वर्ष 1985 में अलीगढ़ यूनिवर्सिटी से अरबी में एमए किया था। यहां पर सिमी कार्यकर्ताओं के संपर्क में आकर ये कट्टरपंथी बन गया। संगठन में शामिल होने के बाद ये सिमी के कार्यक्रमों में शामिल होने के अलावा युवकों को जेहादी बनाने लगा। तत्कालीन सिमी अध्यक्ष अशरफ जाफरी ने इसे सिमी की मैगजीन के हिंदी वर्जन का संपादक बना दिया था। ये चार वर्ष तक संपादक रहा। इसने भारत में मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार जैसे काफी लेख मैगजीन में लिखे। जामिया नगर में पुलिस दबिश के दौरान ये फरार हो गया था।
अब्दुल्ला कई आतंकियों के संपर्क में था
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार जामिया नगर से फरार होने के बाद अब्दुल्ला अलीगढ़ गया। अब्दुल्ला वहां आतंकी अबदुश सुभान कुरैशी उर्फ तौकीर, दूसरे आतंकी अबू बशर से मिला था। अब्दुल्ला ने इनको भारत सरकार के खिलाफ देशविरोधी गतिविधियों के लिए उकसाया था। इन दोनों आतंकियों ने अपने अन्य साथियों की मदद से वर्ष 2008 में सीरियल बम धमाके किए थे।
सीरियल बम धमाकों के बाद अबू बशर अलीगढ़ में अब्दुल्ला के घर रूका था। अब्दुल्ला के कहने पर ही इन आतंकियों ने केरल में सिमी के आतंकी ट्रेनिंग कैंप शुरू किए थे। अब्दुल्ला ने स्वीकार किया है कि वह यूपी, एमपी व गुजरात में जाकर युवकों को जेहादी बना चुका है।
माता-पिता ने किया था धर्म परिवर्तन
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार अब्दुल्ला ने बीए शिवली कॉलेज, आजमगढ़ यूपी से किया था। इस दौरान इसके माता-पिता ने हिंदू से मुस्लिम धर्म अपना लिया। ऐसे में अब्दुल्ला ने भी धार्मिक मुस्लिम साहित्य को पढ़ना शुरू कर दिया। धर्म परिवर्तन के बाद ये मदरसों में जाने लगा। इसके बाद वर्ष 1985 में अलीगढ़ से एमए किया और सिमी के सदस्यों के संपर्क में आया।